सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

अंतरताने पर हिंदुत्व के योद्धा सुरेश(suresh) (पांचजन्य ३० जनवरी २०११)

सबसे पहले तो में अपने सभी अनुसरनकर्ताओं को धन्यवाद देता हूँ कि आपने मुझे शतकधारी बनायाआपका समय समय पर सहयोग मिलता रहा किन्तु कभी तो कार्य भार की वजह से ,तो कभी स्वास्थ्य के कारण लेखन में निरंतरता की कमी रही ब्लॉग लेखन को वर्ष पुरे होने वाले हैं। आशा करता हूँ कि आपका प्यार सहयोग हमेशा की तरह मिलता रहेगा

२६ फ़रवरी को ब्लॉग लेखन के मेरे वर्ष पूरे हो जायेंगेइस अवसर पर मैं ब्लॉग जगत के उस महारथी को याद करना चाहता हूँ ,जिसके ब्लॉग को पढ़कर मुझे ब्लॉग लेखन की प्रेरणा मिली

अभी हाल ही में मैंने पांचजन्य पत्रिका में धांकड़ ब्लोगर सुरेश चिपलूनकर के बारे में एक आर्टिकिल पढ़ा,आपके सामने वही आर्टिकिल प्रस्तुत कर रहा हूँ


"सुरेश चिपलूनकर का चेहरा जितना शांत दीखता है उतना ही तेज उनकी आँखों में ' उतनी ही तेजस्विता है हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के रक्षक और हिंदुत्व द्रोहियों ,राष्ट्र विरोधियों ,छध्म सेकुलरवाद,आतंकवाद, जिहाद एवं मतान्तरण के खिलाफ आक्रमक तेवरों ने उन्हें अंतरताने की दुनिया का राजा बना दिया है

...........................................आज सुरेश चिपलूनकर अंतरताने की दुनिया में कोई अनजाना नाम नहीं हैवे वर्ष २००७ में अंतरताने की दुनिया में आये थेतब अंतरताने तो इतना लोकप्रिय था,और ही व्यवसायिकलेकिन उनको हिंदुत्व को सूचना के स्टार पर मजबूती पहचाने का जूनून हैवे हिंदुत्व आधारित एक ऐसा अन्तह छेत्र बनाने की तमन्ना रखते हैं जो देशद्रोहियों हिंदुत्व विरोधियों को को करार जवाब दे सकें। यह काम वे लोगों के सहयोग से करना चाहते हैं१८ जुलाई सन १९६५ को पैदा हुए सुरेश की प्रारंभिक शिक्षा सीधी के शिशु मंदिर में और माध्यमिक शिक्षा अंबिकापुर में हुईछिन्द्वारा से विज्ञान से स्नातक होने के बाद नोकरी के बजाय आपका काम शुरू कर दियावे पेशे से पत्रकार नहीं हैं,लेकिन लिखने की कला और धार दोनों में पारंगत हैंहिंदुत्व और राष्ट्रवाद में उनकी गहरी आस्था हैआज उनको पढने वालों की एक बड़ी संख्या विकसित हो चुकी हैउनके लेखन के विरोधी उनकी भाषा शैली से भले ही सहमती रखते हों ,किन्तु कोई भी उनके विषय चयन और तथ्यों को नहीं नकार सकता।

सोनिया की नागरिकता, शिक्षा-दीक्षा आदि से सम्बंधित डाक्टर सुब्रमन्यम स्वामी के लेखों के अनुवाद ,मतदान मशीन से छेड़छाड़ ,कश्मीर कोंग्रेस के छद्म सेकुलरवाद पर किये जा रहे दुष्प्रचारों के खिलाफ लिखे गए लेखों ne चिपलूनकार को चर्चित भी किया और प्रसिद्धि भी दी।"

(पांचजन्य ३० जनवरी २०११)