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स्टॉक(staak) बहुत है.

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मित्रों अभी हाल ही के मेरे पास ललित कर्मा जी एक मेल आई ।बहुत अच्छी लगी। इसलिए आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ। वैसे एक राय में भी आपको दे रहा हूँ कि खरीदने की जल्द बाजी न करें ,स्टाक बहुत है। बुरा न मानो होली है। होली की हार्दिक शुभकामनायें।

चित्तौडग़ढ़ में हुआ था विश्व का सबसे पहला कत्ले-आम - PART -2

( रामदास सोनी) at hindugatha.blogspot.com घमासान युद्ध आरंभ हो चुका था। दो रात और एक दिन तो युद्ध के कारण दोनों पक्षों के सैनिक खाना-सोना तक भूल गए थे। किले के नागरिकों से राजपूतों को भरपूर सहायता मिल रही थी। वे अपने घरों से ज्वलनशील सामग्री ला लाकर मोर्चों पर पहुँचा रहे थे। शस्त्रों का अनवरत निर्माण कर रहे थे। प्राचीरों पर पत्थरों का ढेर लगा था , यदा कदा स्वयं भी शाही सेना पर पथराव के द्वारा प्रत्यक्ष युद्ध में भाग ले रहे । राजपूताने के इतिहास में यह प्रथम अवसर था जब युद्ध विधा से अपरिचत नागरिकों , स्त्रियों और बालकों तक ने मातृभूमि की रक्षा के लिये युद्ध में भाग लिया था। चारों ओर रण मद छाया था। अपनी कमज़ोर स्थिति के बावज़ूद उनका उत्साह भंग नहीं हो रहा था। नागरिकों का मनोबल देख सैनिकों व सरदारों का हौसला भी दुगुना हुआ जाता था। यह देख रनिवासों की राजपूतानियाँ भी घूँघट उलट युद्ध में आ कूदीं। उनका मनोबल देख कर किसी भी सरदार को उन्हें रोकने का साहस नहीं हुआ। जयमल्ल द्वारा उन्हें महलों में रह कर ही युद्ध का परिणाम देखने की बात सुनते ही पत्ता चूंडावत की माँ सज्जन बाई सोनगरी बिफर उ...

चित्तौडग़ढ़ में हुआ था विश्व का सबसे पहला कत्ले-आम - PART -1

मेवाड़ राज्य की राजधानी चित्तौडग़ढ़ का राजप्रासाद। मेड़तिया राठौड़ जयमल्ल वीरमदेवोत,चूंडावत सरदार रावत साईदास, बल्लू सोलंकी, ईसरदास चहुवान, राज राणा सुलतान सहित दुर्ग के सभी प्रमुख रण बांकुरे सरदारों के तेजस्वी वेहरों पर चिन्ताभरी उत्सुकता दिखाई दे रही थी। सभी की निगाहें बादशाह अकबर के पास समझौता प्रस्ताव लेकर गए रावत साहिब खान चहुवान और डोडिया ठाकुर सांडा पर टिकी थी। अकबर के शिविर से लौटे दोनों ठाकुरों का मौन अच्छी खबर का परिचायक न होने के बावज़ूद भी वे युद्ध टलने की आशा न छोड़ पा रहे थे। वातावरण की निस्तब्धता भंग की जयमल्ल ने। उसने पूछा- ''क्या बात है सरदारों आपके चेहरों पर खिन्नता क्यों है? क्या बादशाह ने हमारी समझौते की पेशकश ठुकरा दी? अथवा उसमें कोई असंभव सी शर्त लगाई है?'' डोडिया ठाकुर ने मातृभूमि के लिये सर कटाने को तैयार बैठे जुझारू सरदारों की ओर देखा ''आप ठीक समझे। बादशाह चित्तौड़ विजय के साथ महाराणा उदयसिंह का समर्पण भी चाहता है। उसने कहा है कि महाराणा के हाजिर हुए बगैर किसी भी तरह संधि संभव नहीं है। बादशाह के अमीरों और सलाहकारों ने भी उसे समझौता कर ल...

अंतरताने पर हिंदुत्व के योद्धा सुरेश(suresh) (पांचजन्य ३० जनवरी २०११)

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सबसे पहले तो में अपने सभी अनुसरनकर्ताओं को धन्यवाद देता हूँ कि आपने मुझे शतकधारी बनाया । आपका समय समय पर सहयोग मिलता रहा । किन्तु कभी तो कार्य भार की वजह से , तो कभी स्वास्थ्य के कारण लेखन में निरंतरता की कमी रही । ब्लॉग लेखन को २ वर्ष पुरे होने वाले हैं। आशा करता हूँ कि आपका प्यार व सहयोग हमेशा की तरह मिलता रहेगा । २६ फ़रवरी को ब्लॉग लेखन के मेरे २ वर्ष पूरे हो जायेंगे । इस अवसर पर मैं ब्लॉग जगत के उस महारथी को याद करना चाहता हूँ , जिसके ब्लॉग को पढ़कर मुझे ब्लॉग लेखन की प्रेरणा मिली । अभी हाल ही में मैंने पांचजन्य पत्रिका में धांकड़ ब्लोगर सुरेश चिपलूनकर के बारे में एक आर्टिकिल पढ़ा , आपके सामने वही आर्टिकिल प्रस्तुत कर रहा हूँ । "सुरेश चिपलूनकर का चेहरा जितना शांत दीखता है उतना ही तेज उनकी आँखों में ' उतनी ही तेजस्विता है । हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के रक्षक और हिंदुत्व द्रोहियों , राष्ट्र विरोधियों , छध्म सेकुलरवाद , आतंकवाद ...

दिग्विजय सिंह इसाई है,(digvijay is a converted christian)

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दिग्विजय सिंह के तेवर हिन्दुओं के विरुद्ध कुछ ज्यादा ही गर्म हो रहे हैं।कोई भी नहीं समझ पा रहा है कि वो ऐसा क्यों कर रहा है। अगर इस बात को सत्य माना जाय कि दिग्विजय हिन्दू ही नहीं है ( http://en.wikipedia.org/wiki/Digvijay_Singh_(politician ) (Digvijay Singh was born in the royal family of Raghogarh principality, in Guna district of Madhya Pradesh. He is a rajput also known popularly as Diggi Raja.He studied at the Daly College , Indore, a private school established in 1882. During his school days he was an outstanding sportsman. He was a member of the school team in cricket, hockey and soccer. He represented Central Zone schools in cricket, and also played hockey and football at the college level.He also excelled in squash, and was the Central India champion at the junior level for six years from 1960 to 1966.He also held national ranking in this game.[ clarification needed ]. He is a converted christian.) तब इसका अंदाजा स्यवं ही लगाया जा सकता है।क्यों कि इसाई बनने के बाद हिंदुत्व क...

गणित विद्या और शून्य का आविष्कार

सभी यह जानते हैं कि गणित में शून्य और दशमलव का आविष्कार भारत ने किया है किन्तु यह आंशिक सत्य है क्योंकि गणित विद्या का मूल(कारण) वेदों में है जिसमें न केवल शून्य से लेकर ९ तक सभी प्राकृतिक अंको का वर्णन है वरन अंक गणित, बीज गणित और रेखा गणित सभी गणित विद्या के ३ आधार ईश्वर ने हमको दिये हैं। बहुत से लोग यह मानते हैं आर्य भट्ट ने शून्य का या दशमलव का आविष्कार किया था जोकि गलत है क्योंकि यह तो पहले से ही वेदों में है, आर्य भट्ट निश्चित तौर पर एक महान गणितज्ञ थे इसमें कोई सन्देह नहीं है किन्तु प्राकृतिक संख्याओं के निर्माण का विज्ञान मानव ज्ञान से बहार की बात है। मैं यहाँ वेदों के मन्त्र तो नहीं लिख रहा हूँ किन्तु उनमें से उधृत कुछ एक बातों को लिख रहा हूँ प्रमाण के तौर पर। अंक, बीज और रेखा भेद से जो तीन प्रकार की गणित विद्या सिद्ध की जाती है , उनमें से प्रथम अंक(१) जो संख्या है, सो दो बार गणने से २ की वाचक होती है। जैसे १+१=२। ऐसे ही एक के आगे एक तथा एक के आगे दो, वा दो के आगे १ आदि जोड़ने से ९ तक अंक होते हैं। इसी प्रकार एक के साथ तीन(३) जोड़ने से चार (४) तथा तीन(३) को तीन(३) के साथ जोड़न...

साम्यवादी क्रान्ति के सूत्रधार लेनिन भी वीर सावरकर के घोर प्रशंसक थे.

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भारत की संसद में जब वीर सावरकर के चित्र की प्रतिस्थापना की गयी तो उस समय के सारे कोंग्रेसी सांसद सोनिया मैनो के नेर्तत्व में तथा सारे कम्युनिष्ट सांसद समारोह का बहिष्कार करके चले गए थे। केवल मात्र सोमनाथ चटर्जी ही राजग के सांसदों के साथ संसद में उपस्थित थे। वीर सावरकर मात्र एक सशस्त्र क्रांतिकारी ही नहीं वरन एक युगद्रष्टा थे। युगद्रष्टा के साथ साथ वे एक राष्ट्र स्रष्टा भी थे। वे विश्व क्रांतिकारिता के सूत्रधार और व्यवस्थापक भी थे। उनकी वीरता, धीरता व पांडित्य और कुशल नेत्रत्व को देखकर पूरा विश्व चकित था। साम्यवादी क्रांति के सूत्रधार लेनिन भी वीर सावरकर की विलक्षणता के अत्यधिक प्रभावित थे। जब रूस के क्रांति की प्रष्ट भूमि तैयार हो रही थी,तब लेनिन रूस से जाकर वीर सावरकर के पास जाकर इंग्लेंड में इण्डिया हाउस में छिपे थे।लेनिन अपने अज्ञात वास में वीर सावरकर से रोज घंटों भावी अर्थव्यवस्था पर विचार-विमर्श करते थे। रुसी क्रान्ति सफल हो जाने के पश्चात लेनिन ने अपने प्रथम बजट में वीर सावरकर का आदर सहित उल्लेख किया। उसके पश्चात लेनिन सावरकर से तीन बार और मिले। दोनों के बीच वैचारिक सम्बन्ध लम्...