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कांग्रेस का चिट्टा भाग--1

अंगरेजो को जब यह महसूस हुआ कि,हिंदू और मुसलंमान दोनों की सामूहिक शक्ति के आगे उनका भारत में रुकना मुश्किल है तब अंग्रेजो ने musalim तुष्टिकरण को बढावा देना शुरू कर दिया .सन १८७१ में सर डबल्यू.डबल्यू.हंटर ने अपनी पुस्तक (हिन्दुस्तानी मुसलमान) में लिखा है, "हिंदुस्तान में सब समुदायों को अंग्रेजी सरकार का विरोधी रहने देना अत्यन्त भयानक है। सरकार कि निति मुसलमानों के विरुद्ध अति मुर्खतापुरण है। सरकार को चाहिए कि मुसलमानों को अधिक शिक्षा और सुविधाए देकर उन्हें अपनी ओर खीचना चाहिए".उस स्थिति में उसने सेयद अहमद खान को प्रेरणा देकर अलीगड़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना कराई .कर्नल बेक उसका प्रिन्सिपल बना ।
अंग्रेजो का साथ पाकर मुसलमानों ने हिन्दुओ पर अत्याचार बड़ा दिए .मुसलमानों ने पकडो हिंदू बनाओ मुसलमान के नारे लगाने शुरू कर दिए। अंग्रेजो और मुसलमानों के अत्याचारों से त्रस्त होकर सन१८८५ के आसपास एक बहुत बड़ी क्रान्ति होने वाली थी । उसी माहोल को देखते हुए एक अंग्रेज ऐ .ओ .ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना की।
उस कांग्रेस में अंग्रेजो के चमचो और धनाड्य लोगो को शामिल किया गया । मुख्यत: कांग्रेस की स्थापना भोली -भाली भारतीय जनता के विरुद्ध एक षडयंत्र था।

अंग्रेजो की चाल सफल रही । जो क्रान्ति सन १८८५ के आस पास होने जा रही थी,वह कांग्रेस ने जनता को बहला फुसला कर नही होने दी। भोली-भाली जनता ने कांग्रेस पर विस्वास कर लिया की अब कांग्रेस ही भारत को आजादी दिलाएगी ।

कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में ह्यूम ने कहा की ,देर आए दुरुस्त आए के सिद्धांत को मानते हुए हम सभी एक बार नही, तीन बार नही,नो बार नही,पूरे सताईस बार उस महान विभूति की जय बोले जिसके जूते के फीते भी खोलने लायक भी में नही हूँ।----------सब मिलकर बोलिए महारानी एलिजाबेथ की जय "। और सारा हाल तालियों से गूँज गया ,और इस प्रकार ब्रिटिश साम्राज्यं की स्वामिभक्ति की कसमे लेकर कांग्रेस की नींव राखी गई ।

कांग्रेस की स्थापना के उद्देश्य ---------ह्यूम के कागजो में एक पत्र मिला था । उस पत्र में ह्यूम ने लिखा था की "उसे तीन हजार स्थानों से जानकारी मिली है की अहसाय व गरीब वर्ग एक विद्रोह की तैयारी में है। जो की १८५७ से भी कही बड़ा विद्रोह होगा। कुछ पढ़े लिखे हिंदू इसका नेत्रतव्य कर सकते है,और इसे राष्ट्रिया विद्रोह में बदल सकते है। "(फादर ऑफ़ आई.एन .ऐ)

भारतीय जनता के इस विद्रोह को रोकने के लिए ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना की। भोली भाली जनता कांग्रेस के बहकावे में जल्द ही आ गई । कांग्रेस के लोग सिर्फ़ यही सोचते थे की अंग्रेज भारत को सभ्यता का पाठ पढाने आए है। यही प्रचार उन्होंने जनता के बीच किया, और करते भी क्यो नही,। कांग्रेसी लोगो में अधिकतर लोग सफल व्यवसायी थे। उनकी जीवनशेली आराम की थी। कांग्रेस नेता रानाडे के साथ तो दो दर्जन नोकरो की फोज रहती थी । कांग्रेस की स्थापना के १९ वर्ष बाद १९०४ में मुम्बई अधिवेशन में जो कांग्रेस गान गाया गया था ,वह कुछ इस प्रकार से था -----------

मतभेदों और आपसी फ़ुट से भारत नष्ट हो गया था, उस भारत की प्राचीन गौरव पुन : लोटा दिया गया है। भारत का विकास किया गया ,उद्योग लगाए गए , इंग्लेंड की मदद से, तुम्हारे धन के सहयोग से, ऐसे सम्राट एडवर्ड की शान का सूरज , पूरे विश्व में चमकता रहे। (दा एंसैक्लोपिदिया ऑफ़ आई ऍन सी) कांग्रेस की स्थापना के ३२ वर्ष बाद १९१७ में एक प्रतिनिधि मंडल ,जिसमे गांधी, मोतीलाल नेहरू ,जिन्ना ,तिलक जैसे लोग शामिल थे,वायसराय थेम्स्फोर्ड से मिला था,तब तिलक के विरोध के बावजूद भी उस प्रतिनिधि मंडल ने ब्रिटिश शासन के गुणगान किए। एक तरफ़ कांग्रेस अंग्रेजो के तलवे चाट रही थी,वही दूसरी तरफ़ कांग्रेस क्रांतिकारी नोजवानो के विरुद्ध प्रचार में लगी हुई थी। ३१ मार्च १९१५ को कोलकत्ता की एक आम सभा में गाँधी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा ,की "आप लोगो को उन नोजवानो से कोई सम्बन्ध नही रखना चाहिए ,जो हत्याओ और डकैती का सहारा ले रहे है .उन्हें देश का शत्रु मानना चाहिए "। ७ जुलाय १९१७ को वायसराय के सचिव को आश्वासन देते हुए गाँधी ने लिखा,"मेरी जिंदगी इस हिंसा को रोकने के लिए और जहाँ तक इसने अपना आधार बनाया है,उसे उखाड़ फेकने को समर्पित है"। उस समय भारत में जहाँ एक तरफ़ अंग्रेज हिंदू समाज पर अत्याचार कर रहे थे,वही मुसलमान भी अंग्रेजो का साथ पाकर खुनी खेल में लगे थे। इसके अलावा कांग्रेस ने भी मुसलमानों को अपनी और खीचने के लिए मुसलिम तुष्टिकरण का राग अलापना शुरू कर दिया।

अभी तो शुरुआत है ----------भाग २ जल्द ही आयेगा

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