सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पिशाचों से बचालो देश को

तुम सो रहे हो नोजवानो
देश बिकता है,

तुम्हारी संस्कृति का है खुला
परिवेश बिकता है।

सिंहासनों के लोभियों के हाथ में पड़कर ,

तुम्हारे देश के इतिहास का
अवशेष बिकता है ।

पिशाचों से बचालो देश को,
अभिमान ये होगा,

तुम्हारा राष्ट्र को अर्पित किया
सम्मान ये होगा।

ये आतंकियों को यूँ यदि
सर पे चढायेंगे,

हमलावरों को राष्ट्र के बेटे बताएँगे,

जगह जिनकी है केवल जेल में,

उन्ही दरिंदों को,

लहू जो स्वार्थ में,इस देश का

इनको पिलायेंगे।

सपूतों के बहाए रक्त का
अपमान ये होगा,

शहीदों का हुआ सब व्यर्थ ही
बलिदान ये होगा।

पिशाचों से बचालो .......................

ये आतंकी इरादों को
नजरअंदाज करते है,

जिहादी युद्ध को कुछ
सिरफिरों का खेल कहते है,

वतन, आतंकियों की चाह के
माकूल करके ये,

महज सत्ता की खातिर
देश को गुमराह करतेहैं।

यही होता रहा तो

देश अब शमसान ये होगा,

chamakte सूर्य से इस देश का
अवसान ये होगा।

पिशाचों से ....................................................

चलो इस देश का नवजागरण

तुमको बुलाता है।

समर का तुमको आमंत्रण ,

वह तुमको बुलाता है।

चलो आलोक लेकर के

अँधेरा काट दे इसका,

है तुमपे देश का जो ऋण ,

वह तुमको बुलाता है।

तुम्हारे हर कदम की ताल से,

जयगान ये होगा ,

पुनः सिरमोर दुनिया का,

रे हिंदुस्तान ये होगा।

भविष्य के वतन की पीढियों को

दान ये होगा।

तुम्हारा राष्ट्र को ...............

(रचनाकार...... मेरे पिता श्री देवेन्द्र सिंह त्यागी)



टिप्पणियाँ

  1. तुम्हारे देश के इतिहास का
    अवशेष बिकता है ।


    sundar ati sundar

    bhaav veer ras se ot-prot
    desh prem ka sandesh deti kavita

    जवाब देंहटाएं
  2. पिशाचों से बचालो देश को -बहुत अच्छी वीर रश की कविता | ऐसे ही लिखते रहें|

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुरान और गैर मुस्लमान

इस लेख को लिखने से मेरा किसी भी धर्म का विरोध करने का कोई उद्देश्य नही है। अपितु य ह लेख इस्लाम के प्रचार के लि ए है । कुरान मुसलमानों का मजहबी ग्रन्थ है.मुसलमानों के आलावा इसका ज्ञान गैर मुस्लिमों को भी होना आवश्यक है। ............................................................. मानव एकता और भाईचारे के विपरीत कुरान का मूल तत्व और लक्ष्य इस्लामी एकता व इस्लामी भाईचारा है. गैर मुसलमानों के साथ मित्रता रखना कुरान में मना है. कुरान मुसलमानों को दूसरे धर्मो के विरूद्ध शत्रुता रखने का निर्देश देती है । कुरान के अनुसार जब कभी जिहाद हो ,तब गैर मुस्लिमों को देखते ही मार डालना चाहिए। कुरान में मुसलमानों को केवल मुसलमानों से मित्रता करने का आदेश है। सुरा ३ की आयत ११८ में लिखा है कि, "अपने (मजहब) के लोगो के अतिरिक्त किन्ही भी लोगो से मित्रता मत करो। " लगभग यही बात सुरा ३ कि आयत २७ में भी कही गई है, "इमां वाले मुसलमानों को छोड़कर किसी भी काफिर से मित्रता न करे। " सन १९८४ में हिंदू महासभा के दो कार्यकर्ताओं ने कुरान की २४ आयातों का एक पत्रक छपवाया । उस पत्रक को छपवाने

सनातन धर्म का रक्षक महान सम्राट पुष्यमित्र शुंग

मोर्य वंश के महान सम्राट चन्द्रगुप्त के पोत्र महान अशोक (?) ने कलिंग युद्ध के पश्चात् बौद्ध धर्म अपना लिया। अशोक अगर राजपाठ छोड़कर बौद्ध भिक्षु बनकर धर्म प्रचार में लगता तब वह वास्तव में महान होता । परन्तु अशोक ने एक बौध सम्राट के रूप में लग भाग २० वर्ष तक शासन किया। अहिंसा का पथ अपनाते हुए उसने पूरे शासन तंत्र को बौद्ध धर्म के प्रचार व प्रसार में लगा दिया। अत्यधिक अहिंसा के प्रसार से भारत की वीर भूमि बौद्ध भिक्षुओ व बौद्ध मठों का गढ़ बन गई थी। उससे भी आगे जब मोर्य वंश का नौवा अन्तिम सम्राट व्रहद्रथ मगध की गद्दी पर बैठा ,तब उस समय तक आज का अफगानिस्तान, पंजाब व लगभग पूरा उत्तरी भारत बौद्ध बन चुका था । जब सिकंदर व सैल्युकस जैसे वीर भारत के वीरों से अपना मान मर्दन करा चुके थे, तब उसके लगभग ९० वर्ष पश्चात् जब भारत से बौद्ध धर्म की अहिंसात्मक निति के कारण वीर वृत्ति का लगभग ह्रास हो चुका था, ग्रीकों ने सिन्धु नदी को पार करने का साहस दिखा दिया। सम्राट व्रहद्रथ के शासनकाल में ग्रीक शासक मिनिंदर जिसको बौद्ध साहित्य में मिलिंद कहा गया है ,ने भारत वर्ष पर आक्रमण की योजना बनाई। मिनिंदर ने सबसे प

ये है झांसी की रानी (jhansi ki rani)का असली चित्र.

मित्रो आज १७ जून को झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई की पुन्यथिति है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का यह एकमात्र फोटो है, जिसे कोलकाता में रहने वाले अंग्रेज फोटोग्राफर जॉनस्टोन एंड हॉटमैन द्वारा 1850 में ही खींचा गया था। यह फोटो अहमदाबाद निवासी चित्रकार अमित अंबालाल के संग्रह में मौजूद है। The only photo of Rani Laxmibai of Jhansi, which living in Calcutta in 1850 by the British photographer Ahugoman Jonstone and was pulled. This photo Ahmedabad resident artist Amit Ambalal exists in the collection.