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मुस्लिम चिंतन

आज भारत आजाद है?भारतीय स्वतंत्रता का इतिहास में हिंदू नेताओं के साथ साथ बहुत से मुस्लिम नेताओं को भी हमारे इतिहास में विद्द्यार्थिओं को उदार व देशभक्त बताकर पढाया जाता है। में आपको इन्ही कुछ उदार व्यक्तियों के कुछ व्यक्तत्व आपको बताऊंगा । उसके बाद निर्णय आप करे कि सावरकर को बदनाम करने वाली कांग्रेस इन लोगो के नाम पर चुप क्यो है?



सर सैयद खान .....भारतीय इतिहास में इन महाशय को एक महान व्यक्ति के रूप में पढाया जाता है। इन्ही के शब्दों में "मान लो की अंग्रेज भारत छोड़ कर चले जाय। क्या ऐसी दशा में सम्भव होगा की हिंदू और मुस्लमान समानता के आधार पर सत्तारूढ़ हो जाय ?निश्चय ही नही।...............याद रक्खो की यद्द्य्पी मुस्लमान हिन्दुओं से कम है। उन्हें कमजोर मत समझाना। कदाचित वे अकेले ही सत्ता छिनने में समर्थ होंगे। किंतु यदि ऐसा न भी हुआ तो हमारे मुसलमान पठान भाई टिड्डी दल की तरह अपने पहाडों की वादिओं से निकल पड़ेगे और हिंदुस्तान पर छा जायेंगे और पूरे देश में रक्क्त की नदियाँ बहा देंगे।"

(जान स्तेची... एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोग्रेस पेज न० ५००)



"हम वो है जिन्होंने भारत पर कई शताब्दियों तक राज्य किया है। हमारी कोम उन लोगो के खून से बनी है जिनसे न केवल भारत बल्कि एशिया व यूरोप भी कापते थे। तुम जानते हो कि राज्य करना क्या होता है?"

(सर सैयद अहमद खान , प्रष्ठ..३५)

मौलाना आजाद ................"जब कभी किसी इस्लामी देश पर कोई आक्रमण करे तो उस समय प्रय्तेक मुस्लमान का कर्तव्य जेहाद हो जाता है।" (अल्हीलाल १९२१)



"इस्लामिक राजनीती अपने विकास के लिए केवल इस्लाम में एकता चाहती है। विभिन्न धर्मो के लोगो को उसमे सम्मलित करने का विचार इस्लाम के लिए पराया है। " (कन्फेदेरेसी इन इंडिया)



मोहम्मद अली जोहर ...............इन महाश्यं के नाम पर उत्तर प्रदेश का पूर्व मुख्य मंत्री मुलायम सिंह, जोहर विश्वविद्धालय कि घोषणा कर चुका है तथा कांग्रेस ने सरकारी खर्चे पर इस उदार व धर्म निर्पेक्ष की जीवनी छपवाई है। इन्ही के शब्दों में .............

"यदि अफगानिस्तान भारत पर आक्रमण करेगा तो भारत का हर मुसलमान अफगानिस्तान की सहायता करेगा।"

(मद्रास में दिए गए एक भाषण में)



"अपने मजहब और विशवास के अनुसार में एक व्यभिचारी, बलात्कारी और पतित मुसलमान को मै देवता जैसे गाँधी से भी श्रेष्ठ मानता हूँ।"

(१९२४ में अजमेर व अलीगड़ में दिया भाषण)



आर्श्चय तो यह है कि हमारा इतिहास इन तीनो को भारत का उदार, धर्म निर्पेक्ष,महान स्वतंत्रता सेनानी और भी न जाने क्या-२ लिखता है और हमारे बच्चों को ये सब पढ़ना पड़ता है।वहीं सावरकर ,लाला हर दयाल व भाई परमानन्द जैसे महान क्रांतिकारियों को सांप्रदायिक नेता कहकर इतिहास में कोई स्थान नही दिया जाता। सोनिया के नेर्तात्व वाली कांग्रेस सरकार तो वीर सावरकर को लगातार बदनाम करने par तुली है। क्या यही है भारत का धर्म्निर्पेक्ष इतिहास।

टिप्पणियाँ

  1. आर्श्चय तो यह है कि हमारा इतिहास इन तीनो को भारत का उदार, धर्म निर्पेक्ष,महान स्वतंत्रता सेनानी और भी न जाने क्या-२ लिखता है और हमारे बच्चों को ये सब पढ़ना पड़ता है।वहीं सावरकर ,लाला हर दयाल व भाई परमानन्द जैसे महान क्रांतिकारियों को सांप्रदायिक नेता कहकर इतिहास में कोई स्थान नही दिया जाता। सोनिया के नेर्तात्व वाली कांग्रेस सरकार तो वीर सावरकर को लगातार बदनाम करने par तुली है। क्या यही है भारत का धर्म्निर्पेक्ष इतिहास। ............ye hamare liye sharm ki baat hai

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