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satyarthved.blogspot.com का एक वर्ष पूरा

पिछले कुछ महीनो में कभी बिमारी के कारण, कभी किसी और कारण से मै लेखन कार्य से दूर रहा. मित्रों २० फरवरी को ब्लॉग लेखन का पूरा एक साल हो गया है .१ वर्ष में काफी अच्छा अनुभव रहा .ब्लॉग के कारण पूरे भारत के कई प्रदेशों के लोगो को जाना .कुछ टुच्चे किस्म के लोगो से भी पाला पड़ा।आप समझ तो रहे ही होंगे कि में किन गुरु -चेलों कि बात कर रहा हूँ । खैर छोड़ो सब की अपनी अपनी आदत है कोई कितना भी टोके सुधरती नहीं। ब्लॉग के जन्म दिन पर कल से फिर आपके साथ रेगुलर आरहा हूँ । आप सभी से यही आशा करता हूँ कि आप सभी से पहले की तरह ही सहयोग मिलेगा ।
सभी मित्रों को बताना चाहता हूँ कि मैंने जो पाक्सिक पत्रिका राष्ट्र-समिधा कि शुरुआत की थी ,वह ३ महीने से लगातार छाप रही है। तकनीकी कारणों से मै उसे ब्लॉग पर नहीं डाल पाया हूँ। कल से रेगुलर होने के साथ साथ आज विदा लेता हूँ।

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कुरान और गैर मुस्लमान

इस लेख को लिखने से मेरा किसी भी धर्म का विरोध करने का कोई उद्देश्य नही है। अपितु य ह लेख इस्लाम के प्रचार के लि ए है । कुरान मुसलमानों का मजहबी ग्रन्थ है.मुसलमानों के आलावा इसका ज्ञान गैर मुस्लिमों को भी होना आवश्यक है। ............................................................. मानव एकता और भाईचारे के विपरीत कुरान का मूल तत्व और लक्ष्य इस्लामी एकता व इस्लामी भाईचारा है. गैर मुसलमानों के साथ मित्रता रखना कुरान में मना है. कुरान मुसलमानों को दूसरे धर्मो के विरूद्ध शत्रुता रखने का निर्देश देती है । कुरान के अनुसार जब कभी जिहाद हो ,तब गैर मुस्लिमों को देखते ही मार डालना चाहिए। कुरान में मुसलमानों को केवल मुसलमानों से मित्रता करने का आदेश है। सुरा ३ की आयत ११८ में लिखा है कि, "अपने (मजहब) के लोगो के अतिरिक्त किन्ही भी लोगो से मित्रता मत करो। " लगभग यही बात सुरा ३ कि आयत २७ में भी कही गई है, "इमां वाले मुसलमानों को छोड़कर किसी भी काफिर से मित्रता न करे। " सन १९८४ में हिंदू महासभा के दो कार्यकर्ताओं ने कुरान की २४ आयातों का एक पत्रक छपवाया । उस पत्रक को छपवाने

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