यहाँ देशद्रोही ही मंत्री व .संसद .........बनते है.

सप्रग की पिछली सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे मणिशंकर अय्यर का नाम तो आप सभी को याद होगा। इस सरकार में भी नेताजी मैडम के दूत बनकर जगह जगह सोनिया गान करते घूम रहे है।
मणिशंकर का चरित्र एक ऐसे राष्ट्रद्रोही का रहा है,जिसको कभी छमा नही किया जा सकता।
१९६२ में जिस समय चीन ने भारत पर आक्रमण किया था,उस समय ये नेता लन्दन में पढ़ाई कर रहा था। पूरा का पूरा देश इस आक्रमण से शोकग्रस्त था। गाँव गाँव व नगर नगर से भारतीय सैनिको के लिए धन एकत्र किया जा रहा था।माता व बहनों ने अपने हाथों के जेवर व मंगलसूत्र तक भारतीय सेना के लिए दे दिए थे। सारा देश रो रहा था। परंतु लन्दन में ये देशद्रोही कुछ और ही खेल खेल रहा था। अय्यर व इसके साथी भी सैनिको के लिए चंदा एकत्र कर रहे थे किंतु वो जो धन एकत्र कर रहा था,वो भारतीय सैनिको के लिए नही बल्कि लाल सेना (चीनी सेना) के लिए धन एकत्र कर रहा था।
उसकी इस बात का नेहरू को भी पता था।क्यो कि जिस समय अय्यर का चयन इंडियन फ़ौरन सर्विस में हुआ था, तो देश की सबसे बड़ी जासूसी संस्था ने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखा,तथा उपरोक्त बात का हवाला देते हुए उसके चयन पर रोक लगाने को कहा। परन्तु देश के इस महान? नेता ने भी अय्यर का पक्ष लेते हुए उसके चयन को मान्यता दे दी।
यही प्रक्रिया सप्रग ने अपने प्रथम कार्यकाल में अय्यर को पेट्रोलियम मंत्री बनाकर दोहराई। सोनिया स्तुति करने का अय्यर को इस सरकार ने अरे नहीं माननीय राष्ट्रपति जी (सरकार गलत नहीं लिखा क्योंकि राष्ट्रपति जी भी तो सरकारी है) ने भी प्रसाद दे दिया है बात ये है कि राष्ट्रपति को अधिकार है कि वह कुछ ऐसे लोगों को राजसभा में मनोनीत कर सकता है जिन्होंने कला ,संगीत जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया हो। जिस रास्ते से लता मंगेशकर, हेमा मालिनी जैसे कलाकार राजसभा में पहुंचे उसी रास्ते से अय्यर को राजसभा में भेजने के लिए राष्ट्रपति ने कैसे चुना । न तो अय्यर कोई कलाकार हैं और न ही समाज के लिए कोई ऐसा कार्य किया है जिससे उसे राजसभा के लिए चुना जाय। हाँ अय्यर मैडम भक्त जरूर है,और मैडम कि चमचा गिरी व चरण वंदना का ही प्रसाद के रूप में उसे राजसभा में भेजा जा रहा है।
१९६२ में जो देशद्रोही कार्य अय्यर ने किया था। यही कार्य किसी और देश का व्यक्ति करता तो निश्चय ही उस देश का क़ानून उसे कड़ी से कड़ी सजा देता। परंतु एक देशद्रोही भारत में ही मंत्री व संसद ...................................... बन सकता है। अय्यर इसका जीता जगता सबूत है।
मणिशंकर का चरित्र एक ऐसे राष्ट्रद्रोही का रहा है,जिसको कभी छमा नही किया जा सकता।
१९६२ में जिस समय चीन ने भारत पर आक्रमण किया था,उस समय ये नेता लन्दन में पढ़ाई कर रहा था। पूरा का पूरा देश इस आक्रमण से शोकग्रस्त था। गाँव गाँव व नगर नगर से भारतीय सैनिको के लिए धन एकत्र किया जा रहा था।माता व बहनों ने अपने हाथों के जेवर व मंगलसूत्र तक भारतीय सेना के लिए दे दिए थे। सारा देश रो रहा था। परंतु लन्दन में ये देशद्रोही कुछ और ही खेल खेल रहा था। अय्यर व इसके साथी भी सैनिको के लिए चंदा एकत्र कर रहे थे किंतु वो जो धन एकत्र कर रहा था,वो भारतीय सैनिको के लिए नही बल्कि लाल सेना (चीनी सेना) के लिए धन एकत्र कर रहा था।
उसकी इस बात का नेहरू को भी पता था।क्यो कि जिस समय अय्यर का चयन इंडियन फ़ौरन सर्विस में हुआ था, तो देश की सबसे बड़ी जासूसी संस्था ने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखा,तथा उपरोक्त बात का हवाला देते हुए उसके चयन पर रोक लगाने को कहा। परन्तु देश के इस महान? नेता ने भी अय्यर का पक्ष लेते हुए उसके चयन को मान्यता दे दी।
यही प्रक्रिया सप्रग ने अपने प्रथम कार्यकाल में अय्यर को पेट्रोलियम मंत्री बनाकर दोहराई। सोनिया स्तुति करने का अय्यर को इस सरकार ने अरे नहीं माननीय राष्ट्रपति जी (सरकार गलत नहीं लिखा क्योंकि राष्ट्रपति जी भी तो सरकारी है) ने भी प्रसाद दे दिया है बात ये है कि राष्ट्रपति को अधिकार है कि वह कुछ ऐसे लोगों को राजसभा में मनोनीत कर सकता है जिन्होंने कला ,संगीत जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान दिया हो। जिस रास्ते से लता मंगेशकर, हेमा मालिनी जैसे कलाकार राजसभा में पहुंचे उसी रास्ते से अय्यर को राजसभा में भेजने के लिए राष्ट्रपति ने कैसे चुना । न तो अय्यर कोई कलाकार हैं और न ही समाज के लिए कोई ऐसा कार्य किया है जिससे उसे राजसभा के लिए चुना जाय। हाँ अय्यर मैडम भक्त जरूर है,और मैडम कि चमचा गिरी व चरण वंदना का ही प्रसाद के रूप में उसे राजसभा में भेजा जा रहा है।
१९६२ में जो देशद्रोही कार्य अय्यर ने किया था। यही कार्य किसी और देश का व्यक्ति करता तो निश्चय ही उस देश का क़ानून उसे कड़ी से कड़ी सजा देता। परंतु एक देशद्रोही भारत में ही मंत्री व संसद ...................................... बन सकता है। अय्यर इसका जीता जगता सबूत है।
cheen ke dalaalon ko joote maro saalon ko
जवाब देंहटाएंये भारत का दुर्भाग्य ही है.की देशद्रोही लोग ही सरकार चला रहे हैं.
जवाब देंहटाएंbahut aaccha lagaa aapkaa blog....!!
जवाब देंहटाएंथू है इस पर जिसने अपने देश के विरुद्ध एसा किया. एअसे लोगो के लिया क्या कहा जाये और एअसे लोगो को जनम देने वालो को भी. थू है धिक्कार है ऐसे देशविरोधी व्यक्तियों को जनम देनेवाले भी
जवाब देंहटाएंhttp://parshuram27.blogspot.com/
All congress should be banned
जवाब देंहटाएंएक देशद्रोही भारत में ही मंत्री व संसद ...................................... बन सकता है।
जवाब देंहटाएंहकीक़त से रु-ब-रु करने का शुक्रिया ..और अफसोश की जो नहीं होना चाहिए वो ही होता है
लेकिन कितना और अफ़सोस करेंगे
जवाब देंहटाएंधन्यवाद भूतनाथ जी पर कमसे कम सूरत तो दिखाओ
जवाब देंहटाएंइसी अय्यर ने सोनिया के इशारे पर वीर सावरकर पर कीचड उछाली थी . यह ये नहीं जानता सावरकर हर हिन्दू मन में बसते है.
जवाब देंहटाएंaadrniy aapke vichaar se aaj puraa desh sehmt he haalaat yhi hen hm jis kursi pr jis paarti men netaaon ko dekhte he aapke aalekh men ankit aaropon ko un pr shi paate hen is saahsik vichaar prdrshn ke liyen bdhaai ho . akhtar khan akela kota rajasthan
जवाब देंहटाएंहद कर दी आपने (मैडम)
जवाब देंहटाएंaap ki himmat ko dad achcha laga........jai hind
जवाब देंहटाएंबेहद शर्मनाक ,
जवाब देंहटाएंधन्य है सोनिया गाँधी और धन्य है उस के देशद्रोही भ्रस्ट नेता