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बाल कविता




मुझको पैसे चार मिले हैं,


जितनी जितनी बार मिले हैं ,


खर्च नहीं में उनको करती ,


जोड़ जोड़ कर उनको रखती।


बन्दूक एक दिन उनसे लाकर,


अपने कंधे उसे लगाकर ,


मै भारत के शत्रु गिन-गिन ,


मार भागाउंगी एक दिन ।

अनाहिता त्यागी




टिप्पणियाँ

  1. बहुत सहज चित्रण वाली सुन्दर कविता ।

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  2. nvin ji ek chhoti si bchchi ki bcht yojna or desh ke dushmnon ke prti uskaa gussa waah bhaai vaah aapne to kmaal kr diyaa aapke haath choom lene ko ji krta he akhtar khan akela kota rajasthan

    जवाब देंहटाएं
  3. Bahut achi kavita

    Ye bat kamare bade bade kayar- darpok netaonko bhi nahi samazh me ati vo ye chotisi bachhi ne kahi hai.

    Anahita ko agale karya ke liye shubhecha !

    जवाब देंहटाएं
  4. beta 4 ka pata to tumhe blogs par hi mil jayega.

    जवाब देंहटाएं
  5. o meri chhoti si behna !!
    mujhko hai bas itna kehna !!

    is umra me seekho miljul kar rehna !!
    banduk agar hal karti smasya to ab tak hal ho jati.... hai naa ??

    जवाब देंहटाएं

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