राष्ट्र विरोधी व् हिन्दू विरोधी था गाँधी का असहयोग आन्दोलन

"१९०६ के आस-पास से ही कोंग्रेसमें मतभेद शुरू हो गए थे।कोंग्रेस नरम व गरम दलों में विभाजित हो गयी थी।"
गाँधी अगर चाहते तो वह तिलक के पूर्ण स्वराज्य की मांग को मजबूती प्रदान कर सकते थे।किन्तु गाँधी जी ने ऐसा नहीं किया। गाँधी जी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अपना पहला आन्दोलन शुरू किया,जो इतिहास में असहयोग आन्दोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
वास्तव में असहयोग आन्दोलन, खिलाफत आन्दोलन(खिलाफत क्या बाला थी ,इसे आगे जानेंगे) का एक हिस्सा था। स्यवं गाँधी के शब्दों में ,"मुसलमानों के लिए स्वराज का अर्थ है,जो होना चाहिए। खिलाफत की समस्या के लिए.......खिलाफत के सहयोग के लिए आवश्यक पड़ने पर मै स्वराज्य प्राप्ति को भी सहर्ष स्थगित कर देने को तैयार हूँ।"
अब सबसे प्रथम यह जानना आवश्यक है कि खिलाफत आन्दोलन क्या बला थी?
भारतीय इतिहास में खिलाफत आन्दोलन का वर्णन तो है किन्तु कही विस्तार से नहीं बताया गयाकि खिलाफत आन्दोलन वस्तुत:भारत की स्वाधीनता के लिए नहीं अपितु वह एक राष्ट्र विरोधी व हिन्दू विरोधी आन्दोलन था।
खिलाफत आन्दोलन दूर देश तुर्की के खलीफा को गद्दी से हटाने के विरोध में भारतीय मुसलमानों द्वारा चलाया गया आन्दोलन था। असहयोग आन्दोलन भी खिलाफत आन्दोलन की सफलता के लिए चलाया गया आन्दोलन था। आज भी अधिकांश भारतीयों को यही पता है कि असहयोगआन्दोलन स्वतंत्रता प्राप्ति को चलाया गया कोंग्रेस का प्रथम आन्दोलन था। किन्तु सत्य तो यही है कि इस आन्दोलन का कोई भी रास्ट्रीय लक्ष्य नहीं था।
प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार के पश्चात अंग्रेजों ने वहां के खलीफा को गद्दी से पदच्युत कर दियाथा। खिलाफत+असहयोग आंदोलनों का लक्ष्य तुर्की के सुलतान की गद्दी वापस दिलाने के लिए चलाया गया आन्दोलन था।
यहाँ एक हास्यप्रद बात और है कि तुर्की की जनता ने स्वं ही कमाल अता तुर्क के नेर्तत्व्य में तुर्की के खलीफा को देश निकला दे दिया था।
नरम दल यानि अंग्रेजों की स्वामिभक्ति करने वाला दल था जिसके नेता थे गोखले व मोती लालनेहरू। दूसरा गरम दल जिसके नेता लोक मान्य तिलक थे। तिलक का नारा था ,"स्वराज मेराजन्म सिद्ध अधिकार है और मै उसे लेकर रहूँगा। " या कह सकते हैं कि कोंग्रेस का गरम दल वास्तव में एकराष्ट्रवादी कोंग्रेस का रूप था। यानि कि १९०६ से १९२० तक तिलक के नेर्तत्व में कोंग्रेस एक राष्ट्रवादी दल रहा। लेकिन १९१६ में गाँधी के अफ्रीका से आने के बाद स्थिति बदलनी शुरू हो गयी।सन १९२० में तिलक जी के स्वर्गवास के पश्चात अचानक परिस्थितियों ने अवसर दिया और गाँधी कोंग्रेस का बड़ा नेता बन गया।
गाँधी अगर चाहते तो वह तिलक के पूर्ण स्वराज्य की मांग को मजबूती प्रदान कर सकते थे।किन्तु गाँधी जी ने ऐसा नहीं किया। गाँधी जी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अपना पहला आन्दोलन शुरू किया,जो इतिहास में असहयोग आन्दोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
वास्तव में असहयोग आन्दोलन, खिलाफत आन्दोलन(खिलाफत क्या बाला थी ,इसे आगे जानेंगे) का एक हिस्सा था। स्यवं गाँधी के शब्दों में ,"मुसलमानों के लिए स्वराज का अर्थ है,जो होना चाहिए। खिलाफत की समस्या के लिए.......खिलाफत के सहयोग के लिए आवश्यक पड़ने पर मै स्वराज्य प्राप्ति को भी सहर्ष स्थगित कर देने को तैयार हूँ।"
अब सबसे प्रथम यह जानना आवश्यक है कि खिलाफत आन्दोलन क्या बला थी?
भारतीय इतिहास में खिलाफत आन्दोलन का वर्णन तो है किन्तु कही विस्तार से नहीं बताया गयाकि खिलाफत आन्दोलन वस्तुत:भारत की स्वाधीनता के लिए नहीं अपितु वह एक राष्ट्र विरोधी व हिन्दू विरोधी आन्दोलन था।
खिलाफत आन्दोलन दूर देश तुर्की के खलीफा को गद्दी से हटाने के विरोध में भारतीय मुसलमानों द्वारा चलाया गया आन्दोलन था। असहयोग आन्दोलन भी खिलाफत आन्दोलन की सफलता के लिए चलाया गया आन्दोलन था। आज भी अधिकांश भारतीयों को यही पता है कि असहयोगआन्दोलन स्वतंत्रता प्राप्ति को चलाया गया कोंग्रेस का प्रथम आन्दोलन था। किन्तु सत्य तो यही है कि इस आन्दोलन का कोई भी रास्ट्रीय लक्ष्य नहीं था।
प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार के पश्चात अंग्रेजों ने वहां के खलीफा को गद्दी से पदच्युत कर दियाथा। खिलाफत+असहयोग आंदोलनों का लक्ष्य तुर्की के सुलतान की गद्दी वापस दिलाने के लिए चलाया गया आन्दोलन था।
यहाँ एक हास्यप्रद बात और है कि तुर्की की जनता ने स्वं ही कमाल अता तुर्क के नेर्तत्व्य में तुर्की के खलीफा को देश निकला दे दिया था।
भारत में मोहम्मद अली जोहर व शोकत अली जोहर दो भाई खिलाफत का नेर्तत्व कर रहे थे। गाँधी ने खिलाफत के सहयोग के लिए ही असहयोग आन्दोलन की घोषणा कर डाली। जब कुछ राष्ट्रवादी कोंग्रेसियों ने इसका विरोध किया तो गाँधी ने यहाँ तक कह डाला,"जो खिलाफत का विरोधी है तो वह कोंग्रेस का भी शत्रु है। "
इतिहास साक्षी है कि जिस समय खिलाफत आन्दोलन फेल हो गया ,तो मुसलमानों ने इसका सारा गुस्सा हिदू जनता पर निकला,मुसलमान जहाँ कहीं भी संख्या में अधिक थे ,हिन्दू समाज पर हमला करने लगे. हजारों हिदू ओरतों से बलात्कार हुए,लाखों की संख्या में तलवार के बल पर मुसलमान बना दिए गए. सबसे भयंकर स्थिति केरल में मालाबार में हुए जो इतिहास में मोपला कांड के नाम से जानी जाती है.
मोपला कांड में ही अकेले २० हजार हिन्दुओं को काट डाला गया ,२० हजार से ज्यादा को मुस्लमान बना डाला. १० हजार से अधिक हिदू ओरतों के बलात्कार हुए . और यह सब हुआ गाँधी के असहयोग आन्दोलन के कारण.
इस प्रकार कहा जा सकता है कि १९२० तक तिलक की जिस कोंग्रेस का लक्ष्य स्वराज्य प्राप्ति था गाँधी ने अचानक उसे बदलकर एक दूर देश तुर्की के खलीफा के सहयोग और मुस्लिम आन्दोलन में बदल डाला, जिसे वहांके जनता ने भी लात मरकर देश निकला दे दिया । दूर देश में मुस्लिम राज्य की स्थापना के लिए स्वराज्य की मांग को कोंग्रेस द्वारा ठुकराना इस आन्दोलन को चलाना किस प्रकार राष्ट्रवादी था या कितना राष्ट्रविरोधी भारतीय इतिहास में इससत्य का लिखा जाना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा भारतीय आजादी का दंभ भरने वाली कोंग्रेस लगातार भारत को इसे ही झूठ भरे इतिहास के साथ गहन अन्धकार की और रहेगी.
नवीन त्यागी जी जिस सत्य से दुनिया वाकिफ नहीं उसे जोर से क्यों नहीं कहते...आपको अपनी बात आज बड़े-बड़े मंचों से कहनी चाहिए.
जवाब देंहटाएंआज से आपके ऐतिहासिक ज्ञान का लाभ लेने के लिये मैं भी आया करूँगा.
कांग्रेस अपने ईसाई संस्थापक के समय से ही ब्रिटिस भक्त व हिन्दू विरोधी रही है । कांग्रेस को बहुत प्रयत्न कर लोकमान्य तिलक व महर्षि अरविन्द घोष ने राष्ट्रवादी रूप दिया था । लेकिन बाद में अंग्रेज भक्त गोपाल कृष्ण गोखले व ग्यासुद्दीन गाजी ( गंगाधर ) के पुत्र मोतीलाल नेहरू की सहायता से मोहनदास गांधी ने कांग्रेस को हाईजैक कर लिया जिसका दुष्परिणाम खण्डित भारत व हिन्दू द्रौही सरकारी नीतियों के रूप में हमारे सामने है ।
जवाब देंहटाएंनेहरू - गांधी की कांग्रेस के पाखण्ड को खोलकर हमें एक नये दृष्टिकोण से कांग्रेस की नीतियों पर विचार करने हेतु प्रेरित करती एक महत्वपूर्ण रचना ...... आभार ।
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com
अगर इस कमीने और देशद्रोही "मोहनदास करमचन्द गांधी" (जिसे मूर्ख लोग "महात्मा गांधी" कहते थे) की असलियत जानना चाहते हो तो---- नाथूराम गोडसे द्वारा न्यायालय में दिया गया बयान पढ लो । यह बयान "गांधी वध : क्यों और कैसे ?" नामक किताब में पढने को मिल जायेगा | कांग्रेस ने इस किताब पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन बाद में "न्यायालय" ने प्रतिबन्ध को हटा दिया । अब इस किताब पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है-- इसलिये आज ही यह किताब पढें । इस किताब में इस कमीने "महात्मा गांधी" की सारी करतूतों को उजागर किया गया है ।
जवाब देंहटाएंमहात्मा गांधी---- बहुत ही कायर (डरपोक) इन्सान था । यह एक "मानसिक रोगी" भी था और इसका दिमाग किसी बात को सोचने-समझने के लायक नहीं था । इसने हमेशा गलत निर्णय लिये और अपने गलत निर्णयों के द्वारा हिन्दुओं को भारी हानि पहुंचायी थी । इसने हमेशा "हिन्दुओं" को गुमराह किया और "हिन्दुओं" को कायर (डरपोक) बनाने का प्रयास किया । गांधी की असलियत जानने के लिये "इन्टरनेट" पर यह "लिन्कस" देखें----- On YOUTUBE------ (1) Dialogue between Veer Savarkar and Gandhiji (2) Definition of Hindutva- Veer Savarkar.
जवाब देंहटाएंdeshdrohi gandhi
जवाब देंहटाएंNAVEEN JI APKE LEKH PDKE ACHA LGA , HAM LOGO KO JO ITIHAS PDAYA JA RHA H, USME SIRF GANDHI AUR NEHRU KO HI NAYAK BTAYA JATA H JO KI DONO ANGREJO KE PITHU THE
जवाब देंहटाएंPANKAJ