सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लेके बगावत आग की.

बर्फ के पन्नो पे लिखकर,इक इबारत आग की।
फ़िर रहा करता शहर में, मै तिजारत आग की।

बर्फ से गलते शहर में , ढूँढ़ते जो आशियाँ।
बांटता मै फ़िर रहा,उनको इमारत आग की।

बारूद पर बैठा हुआ मै ,लिख रहा तहरीर हूँ।
ले जाए जिसको चाहिए,जितनी जरूरत आग की।

है वतन के वास्ते, जिनके दिलों में जलजला ।
सिखला रहा करना उन्हें ही,मै इबादत आग की।

कब जरुरत आ पड़े ,फिरसे वतन की कोम को,
भरके गजल में कर रहा हूँ ,में हिफाजत आग की.

लिखने गजल को जब उठाता,मै कलम को हाथ में।
लगती उगलने आंच ये,लेके बगावत आग की।





टिप्पणियाँ

  1. ले जाए जिसको चाहिए,जितनी जरूरत आग की।

    good

    जवाब देंहटाएं
  2. तकदीर मे जिनके लिखा है,बस अँधेरा हर तरफ़।
    सिखला रहा करना उन्हें ही,मै इबादत आग की।

    Great !!

    जवाब देंहटाएं
  3. burf ke peeglte sahar mein ......aag ko baatne ka kaam ..wakai anootha hai ....badhai

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुरान और गैर मुस्लमान

इस लेख को लिखने से मेरा किसी भी धर्म का विरोध करने का कोई उद्देश्य नही है। अपितु य ह लेख इस्लाम के प्रचार के लि ए है । कुरान मुसलमानों का मजहबी ग्रन्थ है.मुसलमानों के आलावा इसका ज्ञान गैर मुस्लिमों को भी होना आवश्यक है। ............................................................. मानव एकता और भाईचारे के विपरीत कुरान का मूल तत्व और लक्ष्य इस्लामी एकता व इस्लामी भाईचारा है. गैर मुसलमानों के साथ मित्रता रखना कुरान में मना है. कुरान मुसलमानों को दूसरे धर्मो के विरूद्ध शत्रुता रखने का निर्देश देती है । कुरान के अनुसार जब कभी जिहाद हो ,तब गैर मुस्लिमों को देखते ही मार डालना चाहिए। कुरान में मुसलमानों को केवल मुसलमानों से मित्रता करने का आदेश है। सुरा ३ की आयत ११८ में लिखा है कि, "अपने (मजहब) के लोगो के अतिरिक्त किन्ही भी लोगो से मित्रता मत करो। " लगभग यही बात सुरा ३ कि आयत २७ में भी कही गई है, "इमां वाले मुसलमानों को छोड़कर किसी भी काफिर से मित्रता न करे। " सन १९८४ में हिंदू महासभा के दो कार्यकर्ताओं ने कुरान की २४ आयातों का एक पत्रक छपवाया । उस पत्रक को छपवाने

सनातन धर्म का रक्षक महान सम्राट पुष्यमित्र शुंग

मोर्य वंश के महान सम्राट चन्द्रगुप्त के पोत्र महान अशोक (?) ने कलिंग युद्ध के पश्चात् बौद्ध धर्म अपना लिया। अशोक अगर राजपाठ छोड़कर बौद्ध भिक्षु बनकर धर्म प्रचार में लगता तब वह वास्तव में महान होता । परन्तु अशोक ने एक बौध सम्राट के रूप में लग भाग २० वर्ष तक शासन किया। अहिंसा का पथ अपनाते हुए उसने पूरे शासन तंत्र को बौद्ध धर्म के प्रचार व प्रसार में लगा दिया। अत्यधिक अहिंसा के प्रसार से भारत की वीर भूमि बौद्ध भिक्षुओ व बौद्ध मठों का गढ़ बन गई थी। उससे भी आगे जब मोर्य वंश का नौवा अन्तिम सम्राट व्रहद्रथ मगध की गद्दी पर बैठा ,तब उस समय तक आज का अफगानिस्तान, पंजाब व लगभग पूरा उत्तरी भारत बौद्ध बन चुका था । जब सिकंदर व सैल्युकस जैसे वीर भारत के वीरों से अपना मान मर्दन करा चुके थे, तब उसके लगभग ९० वर्ष पश्चात् जब भारत से बौद्ध धर्म की अहिंसात्मक निति के कारण वीर वृत्ति का लगभग ह्रास हो चुका था, ग्रीकों ने सिन्धु नदी को पार करने का साहस दिखा दिया। सम्राट व्रहद्रथ के शासनकाल में ग्रीक शासक मिनिंदर जिसको बौद्ध साहित्य में मिलिंद कहा गया है ,ने भारत वर्ष पर आक्रमण की योजना बनाई। मिनिंदर ने सबसे प

शठे शाठ्यम समाचरेत (tufail chaturvedi )

ग़ज़वा-ए-हिन्द यानी भारत को जीतने का पुराना स्वप्न, कुत्सित आँखों की विभिन्न चरणों की योजना सदियों से चल रही है। ख़ासी सफल भी हुई है। वृहत्तर भारत की बहुत सारी धरती भारत से अलग की जा चुकी है। आपसे, इसी के एक चरण अर्थात बांग्ला देश को विराट भारत से अलग करने के षड्यंत्र के बारे में पिछले अंक में चर्चा हो चुकी है। उसी षड्यंत्र के एक और भाग म्यांमार की बातचीत आज करना चाहता हूँ। मूर्ति पूजक, प्रकृति पूजक, बौद्ध तंत्र तथा बुद्ध धर्म की महायान शाखा को मानने वाला म्यांमार या बर्मा भारत, थाईलैंड, लाओस, बांग्लादेश और चीन से घिरा हुआ देश है। इसका आकार 6,76,578 वर्ग किलोमीटर का है। इसकी धरती रत्नगर्भा है। माणिक, जेड जैसे कीमती जवाहरात, तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य खनिज संसाधनों से समृद्ध यह देश बहुत समय से उथलपुथल से भरा हुआ है। यहाँ सैन्य शासन लगातार उपस्थिति बनाये हुए है। सैन्य शासन समाप्त होने के बाद भी राजनैतिक दल सैन्य अधिकारियों से भरे हुए हैं। बर्मा में भी मुस्लिम धर्मांतरण के साथ संसार के अन्य सभी देशों में होने वाली उथल-पुथल शुरू से है। सभी अमुस्लिम देशों जिनमें इस्लाम का प्रवेश हो ग