संदेश

भारत का स्वाधीनता यज्ञ और हिन्दी काव्य

"हिमालय के ऑंगन में उसे, प्रथम किरणों का दे उपहार।" “जगे हम लगे जगाने विश्व, देश में फिर फैला आलोक, व्योम तम पुंज हुआ तब नष्ट, अखिल संस्कृति हो उठी अशोक।” परिवर्तन की जीवंत प्रक्रिया सतत् प्रवहमान है। संहार के बाद सृजन, क्रांति के बाद शांति और संघर्ष के बाद विमर्श का सिलसिला मानव के अन्तर्वाह्य जगत में चलता रहता है। मनुष्य का असन्तोष से भरा जीवन आजन्म संधर्ष की स्थिति को झेलता रहता है, लड़ाइयाँ लड़ता है, नयी व्यवस्था के निर्माण के लिए पुरानी व्यवस्था पर आघात करता है, इसी द्वन्द्व की स्थिति में वह जीता मरता रहता है। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के निर्माण में व्यक्ति की यही संधर्षशील चेतना कार्यरत है। गुलामी के बन्धन को तोड़कर उन्मुक्त होने की कामना ने 1857 में क्रान्ति की नयी जमीन को खोज निकाला। इस क्रान्ति महायज्ञ में प्रथम आहुति देने वाले बलिया जनपद के हलद्वीप गाँव के ब्राह्यण कुलोत्पन्न पंडित मंगल पाण्डेय ने 8 अप्रैल 1857 को अपनी शहादत से स्वतन्त्रता का प्रथम दीप जलाया। आजादी को लेकर देश में व्याप्त उथल-पुथल को हिन्दी कवियों ने अपनी कविता का विषय बनाकर साह...

स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है,और मै इसे लेकर रहूँगा.

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(२३ जुलाई, 1856- १ अगस्त १९२०) "स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है,और मै इसे लेकर रहूँगा।" बाल गंगाधर तिलक (२३ जुलाई, 1856- १ अगस्त १९२०) भारत के एक प्रमुख नेता, समाज सुधारक और स्वतन्त्रता सेनानी थे। ये भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता थे। इन्होंने सबसे पहले भारत में पूर्ण स्वराज की माँग उठाई। इनका कथन "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" बहुत प्रसिद्ध हुआ। इन्हें आदर से "लोकमान्य" कहा जाता था। इन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। तिलक ने अंग्रेजी सरकार की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की बहुत आलोचना की। इन्होंने माँग की कि ब्रिटिश सरकार तुरन्त भारतीयों को पूर्ण स्वराज दे। केसरी में छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया। ‘क्या ये सरकार पागल हो गई है?’ और 'बेशर्म सरकार' जैसे उनके लेखों ने आम भारतीयों के मन में रोष की लहर दौड़ा दी। दो वर्षों में ही ‘केसरी’ देश का सबसे ज्यादा बिकने वा...

ये है झांसी की रानी (jhansi ki rani)का असली चित्र.

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मित्रो आज १७ जून को झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई की पुन्यथिति है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का यह एकमात्र फोटो है, जिसे कोलकाता में रहने वाले अंग्रेज फोटोग्राफर जॉनस्टोन एंड हॉटमैन द्वारा 1850 में ही खींचा गया था। यह फोटो अहमदाबाद निवासी चित्रकार अमित अंबालाल के संग्रह में मौजूद है। The only photo of Rani Laxmibai of Jhansi, which living in Calcutta in 1850 by the British photographer Ahugoman Jonstone and was pulled. This photo Ahmedabad resident artist Amit Ambalal exists in the collection.

छोडूंगा नहीं एक दिन तो शमशान घाट आवेगा.

मेरी सबसे पहली तुकबंदी "दूर की सोच " एक दिन सुरेन्द्र शर्मा जी मन्दिर पूजा को गए। मन्दिर से जब बाहर आए ,अपने नए जूते गायब पाये । जूते गायब देखकर ,सुरेन्द्र जी ने मचाया शोर, तब एक फूल वाले से पता चला , कि जूते ले गया शैल नाम का चोर। ठाणे में रपट लिखाई, जासूसों को पीछे लगाया, पर शैल नाम का चोर कहीं पकड़ में न आया। थक हार कर बेचारे श्रीमान,जा पहुचे सीधे शमसान , बोले शैल अब देखूँगा ,तने कोण बचावेगा छोडूँगा नही एक दिन तो शमशान घाट आवेगा।

यह मेरे इस देश को हो गया क्या आज है.

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यह मेरे इस देशं को ये हो गया क्या आज है ये जिन्दगी की प्रात है या जिन्दगी की सांझ है। उद्देश्यहीन भीड़ क्यों हर तरफ खड़ी हुई। हर आदमी के चेहरे पे गम की परत चढ़ी हुई। यूं देखने मे हर कोई लगता तो पास-पास है। लेकिन दिलों की दूरियां!! कैसा विरोधाभास है? क्यों जिन्दगी के गीत की ये बेसुरी आवाज है। ये मेरे इस ............................................................ ॥ हर सुबह की धूप का सूरज कही है को गया । चांदनी समेटकर अब चाँद भी है सो गया। हर गली के बीच में वहशियाना शोर है। क्यों खुद की आत्मा का खुद आदमी ही चोर है? जाने कैसा बज रहा ये जिन्दगी का साज है। ये मेरे इस देश .............................................. ॥ हर तरफ है नाचती हिंसा भरी जवानिया । मेरे वतन में रह गयी अहिंसा की बस कहानिया। अन्न महंगा है तो क्या खून तो सस्ता हुआ। यहाँ आदमी को आदमी है खा रहा हँसता हुआ। गाँधी के सपनो पे बना ये कैसा रामराज है !!!!! ये मेरे इस देश को .................................................... ॥ जीने की लालसा लिए बस जी रहा है आदमी । यूं विष का घूँट आप ही तो पी रहा है आदमी। असत्य और कपट की जब बू रह...

भारतीय स्वतंत्रता के जनक(fathar of indian independece)

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(veer savarkar) "वीर सावरकर की पीढ़ी में उनके समान प्रभावी, साहसी,ढ्रद,देशभक्त भारतवर्ष में पैदा नही हुआ है। सावरकर ने जो कष्ट सहे हैं,उसी के फलस्वरूप भारत ने स्वाधीनता प्राप्त की है। आदर्श सिधांतों को निभाने के लिए जी जान से प्रयत्न करने वालो में वीर सावरकर का स्थान बहुत ऊचा है। ------वे केवल हिन्दी देशभक्त hee नही,वरन समस्त विश्व के प्रेरणा श्रोत हैं। में तो मानव समाज के दर्शनकार के रूप में उन्हें देखता हूँ। भारतीय जनता का यह आध्य कर्तव्य है कि सम्पूर्ण स्वतंत्रता के जनक के रूप में उनका सत्कार करे."---ये शब्द इंग्लेंड के सुप्रसिद्ध विद्वान् व पत्रकार श्री गाय अल्द्रेड के हैं, जो सावरकर के समय में हेराल्ड,फ्री वूमेन एवं जस्टिस आदि पत्रों के सम्पादक, प्रकाशक व प्रतिनिधि थे.(गाय अल्द्रेड) २५ जून सन १९४४ को सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार की स्थापना पर नेताजी सुभाष चंद्र बोश ने सिंगापुर रेडियो पर अपने संदेश में कहा कि,-------"जब भ्रमित राजनैतिक विचारों और अदूरदर्शिता के कारन कांग्रेस के लगभग सभी नेता अंग्रेज...

राजनीती की मण्डी में सी० बी० आइ०(c.b.i.) रंडी की ओकात रखती है.

पिछले कुछ वर्षों से केंद्र की संप्रग सरकार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के पीछे हाथ-मूंह धोकर पड़ी थी। वहीँ मायावती ने भी कोंग्रेस को कोसने में कोई कमी नहीं की थी। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि सभी विपक्षियों के केंद्र सरकार के विरूद्ध खड़े होने के तुरंत बाद मायावती अचानक पलटा मार कर कोंग्रेस के पक्ष में खडी हो गयी और संप्रग सरकार की सभी नीतियों को ठीक बताया। उससे पुर्व भी सन २००७ में परमाणु समझोते में जब सरकार को महसूस होने लगा कि वामपंथी दल इस समझोते में उसका समर्थन नहीं करेंगे तो अचानक मुलायम सिंह ने सरकार के साथ सहमती जता दी, ओर संप्रग सरकार को समर्थन दे दिया। इसी प्रकार बोफोर्स के आरोपी व सोनिया गाँधी के मित्र क्वात्रोची को भी संप्रग सरकार ने क्लीन चिट दे दी । पिछली सरकार में लालू प्रसाद यादव संप्रग सरकार के साथ थे,उनके विरूद्ध कई घोटालों के मुक़दमे चल रहे थे तथा फैंसला भी आने वाला था कि अचानक उस न्यायधीश का तबादला हो गया जो लालू के केस को देख रहा था। तथा इन्कमटेक्स के ऑफिसरों की मीटिंग में सारा का सारा मामला ही ढीला कर दिया गया। लालू को संप्रग सरकार के समर्थन का इनाम मिल गया। ये...