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नवंबर, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लेके बगावत आग की.

बर्फ के पन्नो पे लिखकर,इक इबारत आग की। फ़िर रहा करता शहर में, मै तिजारत आग की। बर्फ से गलते शहर में , ढूँढ़ते जो आशियाँ। बांटता मै फ़िर रहा,उनको इमारत आग की। बारूद पर बैठा हुआ मै ,लिख रहा तहरीर हूँ। ले जाए जिसको चाहिए,जितनी जरूरत आग की। है वतन के वास्ते, जिनके दिलों में जलजला । सिखला रहा करना उन्हें ही,मै इबादत आग की। कब जरुरत आ पड़े ,फिरसे वतन की कोम को, भरके गजल में कर रहा हूँ ,में हिफाजत आग की. लिखने गजल को जब उठाता,मै कलम को हाथ में। लगती उगलने आंच ये,लेके बगावत आग की।

सरकार देश को बतलाये कि देशद्रोही की परिभाषा क्या है ?

भारत सरकार के गृहमंत्री चिदम्बरम के हालिया बयान के अनुसार उन्होंने कश्मीरी जनता को विशवास दिलाया कि केन्द्र सरकार आजाद कश्मीर की मांग करने वालों व पकिस्तान समर्थक अलगाववादियों (जेहादियों से ) बात करने को तैयार है,और इन सभी बातों को मीडिया से दूर रखा जाएगा। चिदंबरम ने कश्मीर समस्या को राजनीतिक समस्या बताकर भारत की अस्मिता से छेड़-छाड़ करने वाले ,भारत के राष्ट्रिय ध्वज का अपमान करने वाले,भारतीय संविधान को नकारने वाले और लाखों की संख्या में हिन्दुओं का घर-बार उजड़ने वालों को राजनेता के रूप में स्वीकार कर लिया है।केन्द्र सरकार की इसी नीतियों के कारन आज समस्त विश्व के इस्लामिक देश भारत को कश्मीर मुद्दे पर घेरने की तैयारी कर चुके है। भारत के दुश्मन नंबर २ चीन ने तो कश्मीर को अपने नक्शे में एक अलग देश दिखाना शुरू कर दिया है। ३० सितम्बर को दिल्ली में एक प्रेस वार्ता में चिदम्बरम ने कहा कि जेहादियों से लगातार वार्ता चल रही है। कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति इस बात को बता सकता है कि जेहादियों की केन्द्र सरकार से क्या मांगे हो सकती हैं? क्यों कि इससे पहले भी कश्मीर के जेहादियों से ४ बार वार्ता हो चु