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बाल कविता

मुझको पैसे चार मिले हैं, जितनी जितनी बार मिले हैं , खर्च नहीं में उनको करती , जोड़ जोड़ कर उनको रखती। बन्दूक एक दिन उनसे लाकर, अपने कंधे उसे लगाकर , मै भारत के शत्रु गिन-गिन , मार भागाउंगी एक दिन । अनाहिता त्यागी