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भारतीय स्वतंत्रता के जनक(fathar of indian independece)

(veer savarkar) "वीर सावरकर की पीढ़ी में उनके समान प्रभावी, साहसी,ढ्रद,देशभक्त भारतवर्ष में पैदा नही हुआ है। सावरकर ने जो कष्ट सहे हैं,उसी के फलस्वरूप भारत ने स्वाधीनता प्राप्त की है। आदर्श सिधांतों को निभाने के लिए जी जान से प्रयत्न करने वालो में वीर सावरकर का स्थान बहुत ऊचा है। ------वे केवल हिन्दी देशभक्त hee नही,वरन समस्त विश्व के प्रेरणा श्रोत हैं। में तो मानव समाज के दर्शनकार के रूप में उन्हें देखता हूँ। भारतीय जनता का यह आध्य कर्तव्य है कि सम्पूर्ण स्वतंत्रता के जनक के रूप में उनका सत्कार करे."---ये शब्द इंग्लेंड के सुप्रसिद्ध विद्वान् व पत्रकार श्री गाय अल्द्रेड के हैं, जो सावरकर के समय में हेराल्ड,फ्री वूमेन एवं जस्टिस आदि पत्रों के सम्पादक, प्रकाशक व प्रतिनिधि थे.(गाय अल्द्रेड) २५ जून सन १९४४ को सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार की स्थापना पर नेताजी सुभाष चंद्र बोश ने सिंगापुर रेडियो पर अपने संदेश में कहा कि,-------"जब भ्रमित राजनैतिक विचारों और अदूरदर्शिता के कारन कांग्रेस के लगभग सभी नेता अंग्रेज

राजनीती की मण्डी में सी० बी० आइ०(c.b.i.) रंडी की ओकात रखती है.

पिछले कुछ वर्षों से केंद्र की संप्रग सरकार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के पीछे हाथ-मूंह धोकर पड़ी थी। वहीँ मायावती ने भी कोंग्रेस को कोसने में कोई कमी नहीं की थी। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि सभी विपक्षियों के केंद्र सरकार के विरूद्ध खड़े होने के तुरंत बाद मायावती अचानक पलटा मार कर कोंग्रेस के पक्ष में खडी हो गयी और संप्रग सरकार की सभी नीतियों को ठीक बताया। उससे पुर्व भी सन २००७ में परमाणु समझोते में जब सरकार को महसूस होने लगा कि वामपंथी दल इस समझोते में उसका समर्थन नहीं करेंगे तो अचानक मुलायम सिंह ने सरकार के साथ सहमती जता दी, ओर संप्रग सरकार को समर्थन दे दिया। इसी प्रकार बोफोर्स के आरोपी व सोनिया गाँधी के मित्र क्वात्रोची को भी संप्रग सरकार ने क्लीन चिट दे दी । पिछली सरकार में लालू प्रसाद यादव संप्रग सरकार के साथ थे,उनके विरूद्ध कई घोटालों के मुक़दमे चल रहे थे तथा फैंसला भी आने वाला था कि अचानक उस न्यायधीश का तबादला हो गया जो लालू के केस को देख रहा था। तथा इन्कमटेक्स के ऑफिसरों की मीटिंग में सारा का सारा मामला ही ढीला कर दिया गया। लालू को संप्रग सरकार के समर्थन का इनाम मिल गया। ये

सन १९४७ में भारत( bharat ) के बटवारे का सबसे बड़ा कारण

कोन कहता है कि बुड्ढे इश्क नहीं करते ,इश्क तो करते है पर लोग उन पर शक नहीं करते । पर भाई पता नहीं लोग हम पर शक क्यों करते हैं । अरे कम से कम भीड़ में तो शर्म की होती। तू जहाँ जहाँ ,में वहां वहां तुसी न जाओ. बराबर में तो मै ही बैठूँगा। हम तो आपकी हर प्रकार से सेवा करेंगे। चाहे कितना भी झुकना क्यों न पड़े। अब लोगो का काम तो है कहना। नेहरू ने लेडी एडविना के कहने पर ही पकिस्तान का बंटवारा माना था। क्यों माना , इसका उत्तर आपके सामने है । (सभी चित्र गूगल से साभार )

घर में उनके कुत्तों पर भी ,फोंजों के हैं पहरे रहते

सोने के महलों में कुछ तो,ख़ास-ख़ास हैं बहरे रहते। कुछ की तो गर्दन के ऊपर ,दो-दो हरदम चेहरे रहते॥ कहने को मासूम बड़े ही,दिखलाई सबको देते वे । दिल में उनके अन्दर भैया,राज बड़े ही गहरे रहते॥ कसमे खाते रहते जिस पल,दहशतगर्दी से लड़ने की। दहशतगर्दों के ही उनके,उस पल घर में डेरे रहते॥ हत्याओं का दौर देखने ,सज धज कर जब वे जाते। कातिल के हमदर्द सयापे, आँखों को हैं घेरे रहते॥ हर मुश्किल से टकराने का, बंधा रहे हैं साहस जो जो। घर में उनके कुत्तों पर भी , फोंजो के हैं पहरे रहते॥ धरती तपने लगती जब यूं ,लेकर अपने साथ बगुले। सब कुछ स्वाहा करने को फिर,नहीं जलजले ठहरे रहते॥