अयोध्या पर आये निर्णय से कुछ लोग संतुष्ट हैं तथा कुछ असंतुष्ट । इस निर्णय के विरुद्ध हिन्दू महासभा व सुन्नी वक्फ बोर्ड दोनों ही मुख्या पक्ष हैं तथा दोनों ने ही सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है।क्यों कि वक्फ बोर्ड को यह निर्णय बिलकुल मंजूर नहीं है और १९४९ से इस मुक़दमे को लड़ रही हिन्दू महासभा ने भी मुसलमानों को १ इंच भूमि देने को भी मना कर दिया है।
किन्तु एक व्यक्ति और है जिसको इस फैसले से सबसे ज्यादा ठेस पहुंची है,और वो है उत्तर प्रदेश का पुर्व मुख्यमंत्री मुलायम। मुलायम वो व्यक्ति है जिसने अयोध्या में दुसरे मीर बांकी की भूमिका निभायी थी। अपने को अर्जुन ,मुसलमानों को पांडव व हिन्दू समाज को कोरव मानने वाले मुलायम ने अभी हाल ही में कहा था कि मेरी स्थिति उस समय अर्जुन के सामान थी कि मुझे अपने ही लोगों पर गोली चलवानी पड़ी। किन्तु मुलायम सिंह यह बात भूल रहा कि भारत में कभी भी जयचन्द,मानसिंह जैसे गद्दारों की कमी नहीं रही,जिन्होंने भारत मां के आँचल को विदेशी आन्क्रताओं के हाथ में सोंपने के लिए भारत मां के सपूतों के विरुद्ध ही षड्यंत्र रचे।
मुलायम का राजनितिक स्तर इस हद तक नीचे गिर चुका है कि जहाँ उसे केवल हरा ही हरा नजर आता है। अर्जुन के भगवे रंग को वह आतंकवाद का पर्यावाची मानता है। स्थान स्थान पर वह मुसलमानों से छमा याचना करता फिर रहा है।इस्लाम के उलेमाओं से मंत्रणा कर रहा है कि तुम्हारे साथ गलत फैसला हुआ है । जिसका एक उदहारण एक भूरा बुखारी दे चुका है।
मुलायम अपने को भगवन कृष्ण से जोड़ता है।किन्तु मुलायम यदुवंश के नाम पर कलंक है। वह कोर्ट के विरुद्ध जहर उगल रहा है, और तमाम वही बाते कर रहा है जो पकिस्तान की जासूसी संस्था आई एस आई कह रही है। मुलायम स्पष्ट रूप से देश के दुश्मनों का पक्ष ले रहा है। वह लगातार ऐसे बयान दे रहा है जिससे साबित हो रहा है कि वह यदुवंशी न होकर बाबर वंशी है।
मेरी मुलायम के समर्थकों को एक राय है कि वे मुलायम का डी० एन० ए० टेस्ट जरूर कराएं स्पष्ट रूप से उसका मैच गौरी, गजनवी या बाबर के खानदान से जरुर हो जायेगा।
मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010
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