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कभी ना अंतर मिट पायेगा पूजा और अजान में, कभी ना अंतर मिट पायेगा पूजा और अजान में, काफिरों के  सर काट दो लिक्खा यही कुरआन में पूजा में हम यही मांगते, सब मंगल हों , अच्छा हो गैर मुस्लिमो तुम काफिर हो,मुल्ला कहे ये शान में , कभी ना अंतर मिट पायेगा पूजा और अजान में, जो आया उसको अपनाया ,सार धर्म ने यही बताया, काफ़िर की जो गर्दन काटे ,उनका वो गाजी कहलाया। हमने कभी ना अंतर बरता ,मस्जिद और शिवालों में , उनकी नंगी शमशीरों ने मासूमों का रक्त बहाया। चीर हरण बहनो के, कर डाले ,पूरे हिन्दुस्तान में, कभी ना अंतर मिट पायेगा पूजा और अजान में। वेदों के हम रहे पुजारी ,गीता का भी ज्ञान सुनाया, पर अहिंसा के गीतों ने हमको कैसा हीज़ बनाया। वीरों की इस राष्ट्र भूमि ने कभी ना हिंसा पाली थी पर , धर्म ध्वजा की मर्यादा में,हर दुश्मन को मार भगाया। भारत माँ की आन लुट गयी ,असि गई जब म्यान में कभी ना अंतर मिट पायेगा पूजा और अजान में, बम धमाके करते रहते ,मुजाहिद कहलाते है , वोटों की खातिर आँखों के,ये तारे बन जाते है। दूध पिलाने हम साँपों को,पीरों पर ही जायेंगे , पी पी कर ये खून हमारा तालिबान बन जाते हैं। ...
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ये चित्र २००६ में बिजनौर का  है। …यनि ८ साल पुराना। ।हिन्दू महासभा की और से मैं और मेरे साथी ने २००६ से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हर जिले में घूम घूम कर लविंग जेहाद का विरोध करके हिन्दू समाज में जाग्रति लाने की कोशिश करते थे ---- किन्तु उस समय हमारा मजाक उड़ाया जाता था कि हमने हिन्दू व मुसलमानो को लड़ाने के लिए लविंग जेहाद नामक  शब्द गढ़ लिया है।
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१४ नवंबर नेहरू के जन्म दिन पर विशेष  हमें नेहरुओं के बारे में कुछ नई सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिसे हम पाठकों को  बताना चाहते हैं। हम आप को सूचित कर चुके हैं कि जवाहर के पितामह यानी दादा का नाम गंगाद्दर कौल था। मुगल राज्य में गंगाद्धर पुलिस अधिकारी  था। वह नहर के किनारे रहता था, इसीलिए इस परिवार ने नेहरू नाम धारण कर लिया। ऐसा बताया जाता है। अब सूचना मिली है कि गंगधर नकली नाम था। जवाहर का पैतृक पितामह वास्तव में मुगलवंशीय था। तब उसने कश्मीरी हिंदू नाम क्यों धारण किया? हमें जो कारण बताए गए हैं, वे निम्नलिखित हैं, 1857 के गदर में अंग्रेज सभी जगह सभी मुगलों को कत्ल कर रहे थे। ताकि भारतीय साम्राज्य का कोई दावेदार न बचे। उस समय हिंदू अंग्रेजों के निशाने पर नहीं थे। जब तक कि, किसी विशेष परिस्थिति में, पिछले संबंधों के कारण, कोई हिंदू मुगलों का पक्ष लेते हुए न पाया जाए। यही कारण था कि मुसलमानों द्वारा हिंदुओं का नाम अपनाए जाने का उस समय चलन हो चुका था। इसी कारण से, मालूम होता है कि, गंगाधर नाम भी किसी मुसलमान ने, अपनी जान बचाने के लिए धारण कर लिया। अपने आत्मचरित्र वर्णन में जव...
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द्रोपदी के पांच पति थे या एक: क्या कहती है महाभारत? -राकेश कुमार आर्य द्रोपदी महाभारत की एक आदर्श पात्र है। लेकिन द्रोपदी जैसी विदुषी नारी के साथ हमने बहुत अन्याय किया है। सुनी सुनाई बातों के आधार पर हमने उस पर कई ऐसे लांछन लगाये हैं जिससे वह अत्यंत पथभ्रष्ट और धर्म भ्रष्ट नारी सिद्घ होती है। एक ओर धर्मराज युधिष्ठर जैसा परमज्ञानी उसका पति है, जिसके गुणगान करने में हमने कमी नही छोड़ी। लेकिन द्रोपदी पर अतार्किक आरोप लगाने में भी हम पीछे नही रहे। द्रोपदी पर एक आरोप है कि उसके पांच पति थे। हमने यह आरोप महाभारत की साक्षी के आधार पर नही बल्कि सुनी सुनाई कहानियों के आधार पर लगा दिया। बड़ा दु:ख होता है जब कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति भी इस आरोप को अपने लेख में या भाषण में दोहराता है। ऐसे व्यक्ति की बुद्घि पर तरस आता है, और मैं सोचा करता हूं कि ये लोग अध्ययन के अभाव में ऐसा बोल रहे हैं, पर इन्हें यह नही पता कि ये भारतीय संस्कृति का कितना अहित कर रहे हैं। आईए महाभारत की साक्षियों पर विचार करें! जिससे हमारी शंका का समाधान हो सके कि द्रोपदी के पांच पति थे या एक, और यदि एक था तो फिर व...

एक थी नीरजा

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एक थी नीरजा 5 सितम्बर 1986 को आधुनिक भारत की एक विरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों को जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भारत के कितने नवयुवक और नवयुवतियां उसका नाम जानते है। कैटरिना कैफ, करीना कपूर, प्रियंका चैपड़ा, दीपिका पादुकोड़, विद्याबालन और अब तो सनी लियोन जैसा बनने की होड़ लगाने वाली युवती क्या नीरजा भनोत का नाम जानती है। नहीं सुना न ये नाम। मैं बताता हूँ इस महान विरांगना के बारे में। 7 सितम्बर 1964 को चंड़ीगढ़ के हरीश भनोत जी के यहाँ जब एक बच्ची का जन्म हुआ था तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान इस बच्ची को मिलेगा। बचपन से ही इस बच्ची को वायुयान में बैठने और आकाश में उड़ने की प्रबल इच्छा थी। नीरजा ने अपनी वो इच्छा एयर लाइन्स पैन एम ज्वाइन करके पूरी की। 16 जनवरी 1986 को नीरजा को आकाश छूने वाली इच्छा को वास्तव में पंख लग गये थे। नीरजा पैन एम एयरलाईन में बतौर एयर होस्टेज का काम करने लगी। 5 सितम्बर 1986 की वो घड़ी आ गयी थी जहाँ नीरजा के जीवन की असली परीक्षा की बारी थी। पैन एम 73 विमान करांची, पाकिस्तान के ...

संस्कृत(sanskrat) को मृत भाषा कहने वाले अपनी माँ को गाली दे रहे हैं

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देवभाषा संस्कृत की गूंज कुछ साल बाद अंतरिक्ष में सुनाई देगी । इसके वैज्ञानिक पहलू जानकर अमेरिका नासा की भाषा बनाने की कसरत में जुटा हुआ है । इस प्रोजेक्ट पर भारतीय संस्कृत विद्वानों के इन्कार के बाद अमेरिका अपनी नई पीढ़ी को इस भाषा में पारंगत करने में जुट गया है। गत दिनों आगरा दौरे पर आए अरविंद फाउंडेशन [इंडियन कल्चर] पांडिचेरी के निदेशक संपदानंद मिश्रा ने 'जागरण' से बातचीत में यह रहस्योद्घाटन किया कि नासा के वैज्ञानिक रिक ब्रिग्स ने 1985 में भारत से संस्कृत के एक हजार प्रकांड विद्वानों को बुलाया था। उन्हें नासा में नौकरी का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है, जिसमें सूत्र के रूप में कंप्यूटर के जरिए कोई भी संदेश कम से कम शब्दों में भेजा जा सकता है। विदेशी उपयोग में अपनी भाषा की मदद देने से उन विद्वानों ने इन्कार कर दिया था। इसके बाद कई अन्य वैज्ञानिक पहलू समझते हुए अमेरिका ने वहां नर्सरी क्लास से ही बच्चों को संस्कृत की शिक्षा शुरू कर दी है। नासा के 'मिशन संस्कृत' की पुष्टि उसकी वेबसाइट भी करती है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि 20 साल से नासा...