सोमवार, 13 अप्रैल 2009

सनातन धर्म का रक्षक महान सम्राट पुष्यमित्र शुंग

मोर्य वंश के महान सम्राट चन्द्रगुप्त के पोत्र महान अशोक (?) ने कलिंग युद्ध के पश्चात् बौद्ध धर्म अपना लिया। अशोक अगर राजपाठ छोड़कर बौद्ध भिक्षु बनकर धर्म प्रचार में लगता तब वह वास्तव में महान होता । परन्तु अशोक ने एक बौध सम्राट के रूप में लग भाग २० वर्ष तक शासन किया। अहिंसा का पथ अपनाते हुए उसने पूरे शासन तंत्र को बौद्ध धर्म के प्रचार व प्रसार में लगा दिया। अत्यधिक अहिंसा के प्रसार से भारत की वीर भूमि बौद्ध भिक्षुओ व बौद्ध मठों का गढ़ बन गई थी। उससे भी आगे जब मोर्य वंश का नौवा अन्तिम सम्राट व्रहद्रथ मगध की गद्दी पर बैठा ,तब उस समय तक आज का अफगानिस्तान, पंजाब व लगभग पूरा उत्तरी भारत बौद्ध बन चुका था । जब सिकंदर व सैल्युकस जैसे वीर भारत के वीरों से अपना मान मर्दन करा चुके थे, तब उसके लगभग ९० वर्ष पश्चात् जब भारत से बौद्ध धर्म की अहिंसात्मक निति के कारण वीर वृत्ति का लगभग ह्रास हो चुका था, ग्रीकों ने सिन्धु नदी को पार करने का साहस दिखा दिया।
सम्राट व्रहद्रथ के शासनकाल में ग्रीक शासक मिनिंदर जिसको बौद्ध साहित्य में मिलिंद कहा गया है ,ने भारत वर्ष पर आक्रमण की योजना बनाई। मिनिंदर ने सबसे पहले बौद्ध धर्म के धर्म गुरुओं से संपर्क साधा,और उनसे कहा कि अगर आप भारत विजय में मेरा साथ दें तो में भारत विजय के पश्चात् में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लूँगा। बौद्ध गुरुओं ने राष्ट्र द्रोह किया तथा भारत पर आक्रमण के लिए एक विदेशी शासक का साथ दिया।
सीमा पर स्थित बौद्ध मठ राष्ट्रद्रोह के अड्डे बन गए। बोद्ध भिक्षुओ का वेश धरकर मिनिंदर के सैनिक मठों में आकर रहने लगे। हजारों मठों में सैनिकों के साथ साथ हथियार भी छुपा दिए गए।
दूसरी तरफ़ सम्राट व्रहद्रथ की सेना का एक वीर सैनिक पुष्यमित्र शुंग अपनी वीरता व साहस के कारण मगध कि सेना का सेनापति बन चुका था । बौद्ध मठों में विदेशी सैनिको का आगमन उसकी नजरों से नही छुपा । पुष्यमित्र ने सम्राट से मठों कि तलाशी की आज्ञा मांगी। परंतु बौद्ध सम्राट वृहद्रथ ने मना कर दिया।किंतु राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत प्रोत शुंग , सम्राट की आज्ञा का उल्लंघन करके बौद्ध मठों की तलाशी लेने पहुँच गया। मठों में स्थित सभी विदेशी सैनिको को पकड़ लिया गया,तथा उनको यमलोक पहुँचा दिया गया,और उनके हथियार कब्जे में कर लिए गए। राष्ट्रद्रोही बौद्धों को भी ग्रिफ्तार कर लिया गया। परन्तु वृहद्रथ को यह बात अच्छी नही लगी।
पुष्यमित्र जब मगध वापस आया तब उस समय सम्राट सैनिक परेड की जाँच कर रहा था। सैनिक परेड के स्थान पर hi सम्राट व पुष्यमित्र शुंग के बीच बौद्ध मठों को लेकर कहासुनी हो गई।सम्राट वृहद्रथ ने पुष्यमित्र पर हमला करना चाहा परंतु पुष्यमित्र ने पलटवार करते हुए सम्राट का वद्ध कर दिया। वैदिक सैनिको ने पुष्यमित्र का साथ दिया तथा पुष्यमित्र को मगध का सम्राट घोषित कर दिया।
सबसे पहले मगध के नए सम्राट पुष्यमित्र ने राज्य प्रबंध को प्रभावी बनाया, तथा एक सुगठित सेना का संगठन किया। पुष्यमित्र ने अपनी सेना के साथ भारत के मध्य तक चढ़ आए मिनिंदर पर आक्रमण कर दिया। भारतीय वीर सेना के सामने ग्रीक सैनिको की एक न चली। मिनिंदर की सेना पीछे हटती चली गई । पुष्यमित्र शुंग ने पिछले सम्राटों की तरह कोई गलती नही की तथा ग्रीक सेना का पीछा करते हुए उसे सिन्धु पार धकेल दिया। इसके पश्चात् ग्रीक कभी भी भारत पर आक्रमण नही कर पाये। सम्राट पुष्य मित्र ने सिकंदर के समय से ही भारत वर्ष को परेशानी में डालने वाले ग्रीको का समूल नाश ही कर दिया। बौद्ध धर्म के प्रसार के कारण वैदिक सभ्यता का जो ह्रास हुआ,पुन:ऋषिओं के आशीर्वाद से जाग्रत हुआ। डर से बौद्ध धर्म स्वीकार करने वाले पुन: वैदिक धर्म में लौट आए। कुछ बौद्ध ग्रंथों में लिखा है की पुष्यमित्र ने बौद्दों को सताया .किंतु यह पूरा सत्य नही है। सम्राट ने उन राष्ट्रद्रोही बौद्धों को सजा दी ,जो उस समय ग्रीक शासकों का साथ दे रहे थे।
पुष्यमित्र ने जो वैदिक धर्म की पताका फहराई उसी के आधार को सम्राट विक्र्मद्वित्य व आगे चलकर गुप्त साम्रराज्य ने इस धर्म के ज्ञान को पूरे विश्व में फैलाया। .................................लेख जारी है।

101 टिप्‍पणियां:

  1. sanatan dharm ke is rakxak ka itihas ki aur uplabdhi karayen.

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  2. kripa karke ye batayyen ,jab ashok ahinsa ka pracharak ban gaya tha to bhi uski 9 generation yani bridrath tak desh ka shashan baoddhon ne kaise chalaya.asaliyat mein pushyamitra brahmano ka sashan lana chahta tha.kyonki baoddh samrat sabhi shudra the aur buddha jo swayam shudra the,ne jo sanskritik aur samajik kranti tatha tark aur vigyan ke adhar par dhongi brahmano ko haraya tatha unhe samaj se lagbhag bahishkrit kar diya,isiki pratikranti ke bad hi brahmano ne shadyantra karke baoddh raja brihdrath ki hatya ki aur punah gair barabri wala brahmano ka shashan sthapit kiya.age bahut kuchh hai lekin time nahin hai,mujhse jab chahe charcha kar lena.

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    1. Rakesh tum ABhi bi isi jaati vaad me fanse rehnam Tumko shayad pata nahi ki Maurya Vansh ki sthaapna kese hui thi, Kese ek Brahman Acharya ( CHANAKYA ) ne, Ek Veer Yoddhaa k putra( Chamdra Gupta Maurya ) Ko is dhartee ki mittee me Hi Shiksha Di, or utha kar Betha diya Heera bana kar Raj Singhaasan par, Adharmi Nand vansh ko khatam karke, Agar Vo MAHAAN ACHARYA bhi tumhari tarah hi sochta Jaatevaad me hi parha rehta, to tum jese peda hi nahi hote, kyunki is samay Greek k log raj kar rahe hote yaha

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    2. Arjit Agarwal, aap apni sister ki marriage bhangi jaati m kar sakte hai toh samza jaayega ki aap jaatiwaad m nahi phase hai.

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  3. राकेश जी आपका ज्ञान कुए के मेंडक जैसा है जो समुन्द्र को भी अपने कुए से छोटा समझता है. सबसे पहले तो आपको बताऊँ की मोर्य शासक शुद्र नहीं थे. और वैसे भी उस समय शुद्र शब्द कर्म के आधार पर था.न की म्जाती के आधार पर. अगर ऐसा होता तो एक ब्राहमण चांराक्य चन्द्रगुप्त को भारत का शासक न बनाता. चंगुप्त मोर्य ,अशोक को भारतीय इतिहास में पूजनीय स्थान मिला हुआ है. कभी व्रह्दत्त का इतिहास पड़ने को मिले तो जरूर पढ़ना. व कायर मिनिंदर को अपनी पत्नी तक सोपने के लिए तैयार हो गया था. जहाँ तक बोद्धों की बात है तो ये तो इतिहास कहता है की बोद्धो ने हमेशा विदेसी आक्रमणकारी का साथ दिया .वो चाहे मिनिंदर हो चाहे मोहम्मद बिन कासिम हो.,चाहे महमूद गजनवी हो, चाहे, बाबर हो.सारा का सारा आज का अफगानिस्तान मोहाम्द बिन कासिम के समय बोद्ध छेत्र ही था. सबसे पहले मुसलमान बन्ने वालों में बोद्ध अगर्नी थे. भगवान् बुद्ध को मै भी मानता हूँ,और शायद तुमसे ज्यादा .अगर कोई भी व्यक्ति ये बता दे की भगवान् बुद्ध ने आक्रमणकारी के सामने भी अहिंसा का उपदेश दिया था,या कभी राष्ट्रद्रोह की बात की हो की यदी कोई भारत पर आक्रमण करता है तो उसका स्वागत करके उसका रास्ता चुद दो,यदि वो कहे की मे बोद्ध बन जाऊँगा तो उसका सहयोग करो. .तो उसे सामने लाओ. वर्ना उलटी सीधी बकवास लिखनी छोड़ दो. भगवान् बुद्ध की अहिंसा कभी भी देश के अहित में नहीं रही. किन्तु उनके चेलों ने जरूर कई कई बार राष्ट्रद्रोह करके बार बार विदेशी आक्रमण कारियों का साथ दिया.

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    1. naveen ji aap ko itihaas padna chaye morya shashak shudra varn m aate h..
      jo ki hinduao ki nikrat varn tha. aur aap ki baat gale nhi utrti ki bodhho n isliye deshdroh kiya ki milind bodhh dhamm accept kar lega, kyunki brahdatt morya bhi boudhh hi tha... aap itihaas ko tod marodkar sachhayi chhupa rhe h. vese bhi saari duniya is baat ko jaanti h ki manu smriti shung vansh m likhi gayi thi jo is baat ko pakka karta h ki pushyamitra brahman wadi vyavastha lana chahta tha isiliye dokhe se deshdrohi ka kaam kar brahdatt morya ka katl kar diya...

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    2. tyagi ji bahut ache ja rahe hai aap lage rahe kuch desh ke gaddaro ne bahut koshish ki desh ko todne ki par wo ho nahi paye jis din brahaman ek ho gaya us din bhoochal aa jayega or jis din brahaman or thakur ek ho gaya punha pura bharat hindu hoga

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    3. Mr Benami ji@ Brahmano ki baat to aap na kare to accha hi hoga ye wo koom hai jo sabse pahle Dharam badalti hai or rahi bhuchaal aane ki to ek ladai bata do jo musalmano se ladi ho brahmano ne ,or rahe thakuro ki baat to ithaas uth lo or dekho ki kistarha se apni bahen betiyan dekar wo muglo ke gulaam bane .....aap baat karte hai sudro ki to batata hu ki Chandra gupta morya hi nahi kuru or pandav vans bhi sudra tha .....kuki vyas rishi sudra kehe jaate hai or ye vans vyas se hi chala th....jaayea apna gyan badayea

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    4. tyagi ji nesahi kaha brahmano ne bhi ladayia ladi hai pratyaksh udharan pushyamitra shung hai aur udharan deta hu dronachrya ke samne pandav to kya swayam bhagwan bhi vivash the ,ravan ke bare me to jante hoge swayam bhagwan ko ravan ko marne ke liye janam lena pada ,raja dahir harta nahi balki jjeet chuka tha dhoke se mdkasim ne use haraya harshwardhan ko jante honge bharat ka antim samrat aur jhansi ki rani ke bare me jante hihonge..kitne udharan du

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    5. मौर्य शासक शूद्र नही थे ये तो अंग्रेजो की चाल का एक भाग हे शूद्र एक वर्ण हे जो कर्तव्य से मिळता हे और

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    6. Benami ji, Sayad aap hi jaise log hai jo apne ghar ke matke ke pani ko ganda aur doosre gharon ke bahte nali ko sudh aur swach mante hai. Desh ke btware ke bare bahut chinta hai aapko. Kya galat hai yadi ek hindu office me dhoti kurte me jaye. kya galat hai yadi hum mantro ka ucharad jor jor se mike me karte hai. kya galat hai yadi hindu dharm tatha uski riti riwajo ka aane wali pidhiyon ko gyan diya jaye. kya galat hai yadi hum apne desh ke bachao me desh ke gaddaro ka mukabla karna chahte hai.

      Aap jaise log hi hote hai jo kasmir me marne wale aatankiyon ko swatantrata senani aur sainikon ko desdrohi aur byabhichari kahete hai. kyunki aap jaise log apni bibi ke pallon me chup kar rahte hai. bahutik sukho me aise leen ho gaye hai jaise ki sade pani me piluwa. ek musaleman MNC me kaam jaroor karta hai per apne riti riwaj ko nahi bhoolta. din me 5 baar na sahi per 2 baar jarror namaj padhta hai. aaj MNCs me hume pooja ki jagah nahi milti magar unke liye namaj padhne ki puri byawastha hai. ghiinnn aati hai aap jaise ki soch per jo apne dharmik mandir me nahi jate hai per charch me jaroor jayenge, masjid me jaroor jayenge aur gudgaan karte hai.

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    7. प्राचीन भारत में मौर्य वंश के अन्तर्गत पहली बार राजनैतिक एवं सांस्कृतिक एकता स्थापित करने का प्रयास किया। बाद में चलकर सातवाहन वंश ने इस प्रयास को आगे बढ़ाया। यद्यपि इतिहासकार सातवाहनों को दक्कन में मौर्यों का उत्तराधिकारी हैं तथापि इस वंश के उदय को अशोक के बौद्ध राज्य के विरूद्ध सामान्य जैन तथा हिन्दु प्रक्रिया के रूप में भी समझा जाना चाहिए। सातवाहन वंश की स्थापना मौर्य वंश के पराभव से लगभग पचास वर्ष पहले हुई। उनका साम्राज्य दक्षिण भारत का सबसे प्राचीन और बड़ा साम्राज्य था। उत्तर भारत निरन्तर बदलते राजवंशीय परिदृश्य (जहां मौर्यों के पतन के बाद छोटे-छोटे अन्तराल पर शुंग, कण्व -शुंग बामन ही था देश को गुलाम बनाने वाला

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  4. हिन्दुओं का दुर्भाग्य ही तो था की उन्होंने आर्य न कहलाकर हिन्दू नाम ("काफिर" मुसलमानों द्वारा दिया अरबी नाम) अपना लिया. अब यही हिन्दू अपने गौरवशाली इतिहास में भी खोट निकालनें में लग जाएँ तो आश्चर्य नहीं है | राकेश जैसे लोग स्वार्थी राजनैतिक व भ्रामक इतिहासकारों का माध्यम बनकर राष्ट्र व अपनी ही जड़ों को खोदने में लगे हैं | जब तक सत्य ज्ञान व इतिहास का प्रचार नहीं होगा यह स्थिती बनी ही रहेगी |

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    1. Brahman toh Bhartiya hai hi nahi, Brahman toh bahaar se aaya hai. Gusspaithiye chor

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  5. नविन जी,आप जरा ब्रम्हान्वादी विचार धारा को हटा कर निष्पक्षता से विचार करे तो आपको सारी बाते समझ में आ जाएगी....सम्राट वृहद्रथ की हत्या शुंग ने ही की थी,परन्तु धोखे से,शुंग तो उसका सेनापति था...और रही बात बोद्ध भिक्षुवो की तो उन बेचारो ने कभी कोई राष्ट्र विरोधी कार्य नहीं किया,उस वक्त ब्रम्हान्वाद का लगभग पूरी तरह से खात्मा ही हो गया था,क्युकी भगवान बुद्ध द्वारा यज्ञ हेतु पशुवो की हत्या बंद करवाई, सभी जाती के लोगो को सामान अधिकार दिया...इससे वे लोगो के दिल में बस गए.....,सच तो ये है की शुंग सिर्फ ब्रम्हान्वाद के आलावा और कुछ नहीं फैला रहा था ....

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  6. शूद्र महर्षि शम्बूक की ह्त्या किसने की थी? एकलव्य का अंगूठा किसने काटा? विधटनकारी चार वर्ण किसने बनाये? मगध राज्य पर हमला के लिए सिकन्दर को किसने बुलाया था? भारतिय इतिहास का स्वर्णिम प्रुष्ठ लिखने वाले ब्रहद्रथ मौर्य की हत्या, बौध्धो का नरसंहार व विश्वविध्यालयो पुस्तकालयो को किसने ध्वस्त किया? हिटलर को भी बौना व फ़ीका बनाने वाली काले कानूनो की किताब मनुस्मुति का लेखक कौन था? ब्रह्मा सत्या जगत मिथ्या के मिथ्यावाद की आड में गुप्तकाल के स्वर्ण युग की विनाश लीला किसने की? प्रुथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय विहीन किसने किया? सोमनाथ के मंदिर का झण्डा झुकाकर मोहम्मद बिन कासिम की विजय किसने सुनिश्चित की? सोमनाथ के मंदिर का जो फ़ाटक हाथियो से भी नही टूट्ता उसे मोहम्मद गजनी की गद्दारी के लिए किस गद्दार व लालची ने खोला? मोहम्मद गोरी को जयचन्द की चिठ्ठी ले जाने वाला कौन था? बंगाल का वह गद्दार राजा कौन था जो मोहम्मद बख्तियार के डर से महल के पीछे के दरवाजे भाग गया था? अकबर की भंडैती किसने की, अल्लोपनिषद किसने लिखवाया? तथा भारतिय बहू बेटियो के मीना बाजार किसने लगवाया?

    महाराजा रणजीत सिन्ह व स्वामी दयानंद सरस्वती को भोजन के साथ जहर किसने दिया? सतगुरु रैदास की वाणी को किसने जलाया तथा उनकी हत्या किसने की? छ्त्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक बगैर नहाये बाये पैर के अंगूठे से किसने किया? तथा उनकी व उनके पुत्र की हत्या किसने की? पेशवा बाजीराव कौन था,जिसके डर से सुन्दर महिलाये जहर खाकर आत्म हत्या कर लेती थी? स्वामी विवेकानंद को शूद्र कहकर विश्व्धर्म परिषद मे जाने का विरोध किसने किया था? महात्मा ज्योतराव फ़ूले की हत्या के लिए हत्यारे किसने भेजे थे? भारत का बटवारा किसने और क्यो करवाये थे? गांधी की हत्या किसने की? बाबा साहेब अम्बेडकर को किसकी साजिश से जहर दिया गया? इन्दिरा गांधी को अकाल तख्त उडाने व हजारो सिक्खो की हत्या करने के लिए किसने उकसाया था? इन्दिरा गांधी को किस पन्डे ने मन्दिर परिसर मे नही घुसने नही दिया था? वो जनरल कौन थे जो दवा कराने के बहाने भारत चीन युध्ध का मैदान छोडकर दिल्ली भाग आया था? बीस साल तक विभिन्न मन्त्रालयो के अति गोपनिय दस्तावेजो की मोटी रकम लेकर विदेशो को बेचने वाला कुमार नरायन अय्यर कौन था? मोसाद की मदद से राजीव गांधी की ह्त्या किसने कराई?......

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    1. beta akal bahut kam hai tum me abhi theek hai na ghar jakar itihaas duwar pad nahi to apna kam kar jo hota hai

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    2. chanakaya ne jo kuch kiya desh ke liye kiya use jaise alak tumare vansajo ke vansaj bhee aa jaye na to uski barabari nahi kar sakte or rahi budhu bhagwan ki wo shudra nahi chhatriya the

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    3. स्वामी विवेकान्द, गौतम बुद्ध, चन्द्रगुप्त मौर्य ये सभी क्षत्रीय थे |

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  7. और भगवान बुध्ध को विष्नु का ९वा अवतार किसने घोषित किया? और उस विष्नु के ९वे अवतार के भिक्षुको को किसने जिन्दा जलाया था? अगर अशोक सम्राट नही था, तो ब्रुहद भारत का पहला चितार किसने दिया था?प्लीज ब्राह्मणवादी मानसिकताओ का त्याग करे त्यागीजी! और हिन्दु, आर्य, बौध्ध बनने से पहले भारतीय बने। इस देश का और सत्यानाश ना निकाले।

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  8. aap log bina gyan ke koi tark na kare.pushyamitr ko brahmanvad se na jode.aap logon ka alp gyan yahi kahta hai ki aap logon ne aaj tak vahi padha hai jo ki desh ka vightan karne vale angrejon ne likha. jahan tak pushyamitr shung ka saval hai to kuchh boddh granthon ko chhod kar kahin bhi nahin likkhaa ki shung ne boddhon ko sataya. itihaas ka jankaar har vyakti janta hai ki shung ne minindar ko harane ke baad saikdon ki sankhya me bodh mathon ka nirmaan karaya.
    usne ashok ki tarah sanatan dharm ko kisi par jabardasti nahi lada.shung ne to kya poora itihas saakshi hai ki kabhi bhi kisi hindu shasak ne talvaar ke bal par kabhi bhi kisi ko nahi sataya.

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    1. jis hindu dharm k shastro ki aap baat kar rhe ho wo to apne aap me kalpna s bhare huye h aur ek pakchhiye vichaar s bhare pade hai. aap videshi log jo yaatri k roop m bhaarat aaye unka itihaas padoge to saari baate khulkar saamne aa jayegi. aur bina gyan k tark brahman wadi granth karte h, bodhh granth tarko par hi aadharit h, bodhh logo k ander bhi wahi tarkshilta ka gun vidhmaan h..

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    2. ha ha ha ha sahi gyan har kisi ko hajam nahi hota ye to brahamano ki hi sampati hai jabi to aaj tak raj karte aa rahe hai apni dam par

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    3. Jis hindu dharm ko aap kalpanik kahte hai us hindu dharm ke kisis bhi dharmik karya ko utha lijiye aur duniya ke kisis bhi baigyanik se puch lijiye aapko satyata ka pata chal jayega, Hindu dharm ke harek dharmik riwajo ke peeche bigyan bhara pada hai jo anya kisis bhi dharm me nahi hai. jyada samajhna hai to aapko bigyan padhna padega. aaj aap jaise log apne anaitik aur anaupcharik charitra ka ullu sidha karne ke liye Hindu dharm aur dharmik karyon ko kalpanik aur mithya wad kahte hai. Kyunki aap janete hai ki agar aap use follow karenge to aap ka daroo baji , ladki baji aur bhi anaitk karya peeche choot jayega. Agara aap nahi jante to sant rahiye aur apna karya karen jo aapko aata hai, kyun kisis dharm ko badnam karte hai jab uska aap palan nahi karte. aap aise hi jara kisis anya dharm ki sikayat kijiye na aapko pata chal jayega ji aapki aukat kya hai. sirf itne se hi Hindu dharm ki mahanta samjh lijiye ki aap jaise log jo isko bura kahte hai wo bhi achhi tarah se apne kukarmo ka aanand le rahe hai.

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  9. Pushya Mitra Shunga hi kalpnik ram hai. Ise uske darbari kavi Valmiki ke maha grantha Ramayan se sabit ho jata hai. Pushya Mitra Sunga ne hi Baudhon ke sar katva kar Ghaghra nadi me dala aur us sthan ko saryu kaha aur audhya me apni rajdhani banai. Audhya se sabit ho jata hai ki bina yodhaa ka mila hua raj jahan ram bankar raha aur vahin se apni rajdhani banai. Ram ek darpok, kayar, vishwashghati auraton par julm karne wala mulnivasiyon ko gulaam banane wala sakshat mahavinashi manav hai. Tyagi ji apko Bharat ka itihas 2500 varhso tak ka janna hoga. Apki bharat ki itihas ki vistrit jankari ke liye.

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    1. agar tujhe granthon ke baare mein itni jaankari hai to thik hai lekin tujhe lagta hai ki sirrf 2500 varshon mein hi itihash samahit hai to murkh hai tu , raam pu. nahi the aur balmiki aur valmiki do vyakti the samjhe, aur sanatan dharm kalpo aur vedil manytaao pe aadhaarit hai , brahmino ne kabhi galat kuch nai kia wo vah karte jo koi bhi prishthiti vash hokar karta hai
      aap kitne bhi kamjor kyun naa ho tb bhi ek sher ke saamne apne praan yu hi nahi chod dete . so aap jis tarah se apne liye sochte ho. wo thik hai .

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    2. जो पागल लोग अनपढ गवार पुष्यमित्र को राम केहते हे वो वलिमकि जी का अपमान करते हे वाल्मीकि जी का जन्म सात हजार साल पहले हुवा हे और अशोक काल २५०० साल के अंदर हे ये लोग खुद मजाक बन जाते हे

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  10. janvaro ki bhagvan manane vale santan dharmi buddha dhamm ki maya nahi samaz sakte.lekhak se isase jyada aur kucch apekshit bhi nahi he.
    Ye buddh dhamm ko virata khatam karne wala batate he.lekin ye bhulte he ki india me mughals inhi ke raj me aaye aur angrej bhi inhi darpoko ki vajah se india par itna raj kar sake.

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  11. pushyamitra sanatani vishamtavadi vaidik dharm lana chahta tha.isliye wo keval bhikhuon ko markar chup nahi baitha balki usne vihar,stup nasta kiye.agar vah keval brahdrath ka virodh karta ye sab nasht na karata.

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  12. AAP EK BAT NA BHULE KI KALPNIK UPNYAS RAMAYAN KE NAKLI PATRO ME PUSHYAMITRA SHUNG HI RAM HAI JISANE
    1. SHABHUK (teli) TATHAKATHIT SHUDRA RISHI KI HATYA KI.
    2. MOURYA WANSH KE DASHWE SAMRAT BRAHDRATH MOURYA KO RAWAN BATAYA GAYA HAI,JOKI 10 SHEELO KA PALAN KARNE WALA AUR 10 LOGO KE BARABAR TAQAT RAKHANE WALA VEER SAMRTAT THA.
    3.YE SHUNG (BRAHMAN)WANSH KO AAGE BADHANE WALA RAM(PUSHYA MITRA SHUNG) WASTAV ME SHRINGI RISHI KA BETA THA NA KI DASARATH KA KYONKI RAJA DASHARATH TO NAPUNSHAK THA AUR NIYOG PRATHA SE RAM YANI PUSHYA MITRA SHUNG KA JANM HUAA THA.
    4.YE LADAI BAHUT PURANI HAI APNA DIMAK THHIK RAKHOGE TO SHAYAD SHANTI AA JAYEGI WARNA VIDESHI ANGREJO KI TARAH SE VIDESHI ARYA BRAHMANO KO BHI BHARAT DESH SE BHAGANA HOGA.

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  13. सत्य को बेनाम होने की क्या आव्श्यकता? नाम के साथ आइये, पहचान छिपाने की क्या आवश्यकता? दूसरी बात ब्राह्मण विदेशी हैं .....उन्हें आप भगाना चाहते हैं। भगाने की आवश्यकता नहीं। आप भारत सरकार से अनुरोध करेनं कि भारत से सभी विदेशियों को निकाला जाय और उन्हें उनके मूल देश में वापस भेज दिया जाय, आपका काम आसान हो जायेगा। क्या ब्राहमणों को गालियाँ दिये बिना कोई तर्कसम्मत विमर्श नहीं किया जा सकता?

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    1. jiski usme dam usne kiya raj sabse badi bat ab bhokne se kya hota hai

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  14. I ma kush kumar :- aap ki soch nahi badli aagar esi tarah ka raha to muje ye kaha te kharab nahi lagega ki mi hindu dharm chod kar aany dhasm aapna lunga ye. Ye kisi dar se nahi ye Barahman wadi vichar ke chalte

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  15. Brahaman Videshi he.usane Desh ko toda he.gulam banaya he.desh ka Jhutha itihas likha he.

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  16. बोद्ह्ह लोग....इनका भगवान सुकर मधः पीकर अतिसार का रोगी बना और मर गया इसे ये लोग निर्वाण की संज्ञा देते हैं.जानवरों को गेंहू खिला खिला कर मरते हैं फिर उसका मांस खाते हैं .ये इनकी अहिंसा हैं. वेद व्यास पराशर ऋषि के पुत्र थे

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  17. BUDDHI JIVI INSAN APNI PHATI HUI EJJAT KO AUR BEIJJAT HONE KE LIYE KHULI NAHI CHODTE USE DHAKNEKI KOSHIS KARTE HAI TO AAP NAVINJI KYO USE AUR PHATI HUI KO AUR FADTE HO AAP JANTE HO DUNIYA ME JITNEBHI DHARM HUYE SAB INSAN KO EK INSAN KI TRHA INSANOME INSAN BANE RAHANEKI SHIKSHA DETE HAI TAKI INSANKO EK ACCHA JIVAN YAPAN KA MARG MILE MAGAR BHARAT HI EK AISA BAD NASHIB DESH HAI KI JIS DESH ME MUTTHI BHAR LOGONE SIRF APNA SWARTH AUR APNI LALSAKO MUDDE NAJAR RAKHKAR SAMAJ AUR INSANIYET KA BEDA PAR KAR DIYA DHARM KE NAM PAR APNEHI DESH VASHIYOKO JALIL KIYA HAMNE AAPAS MEHI EK DUSREKO MARVAYA EK DUSROKI BAHU BETIYO KI IJJATKI NILAMI KI HAMARI IS AAPSHI DARAR KO DEKHTE PARDESHIYONE HAMARE UPPAR SHASAN KIYA JINJIN LOGONE HAME ACCHA MARG DIKHANEKI KOSHIS KI HAMNE UNHIKO MITTAYA AUR MITAATE AARAHE HAI AAJ BHI HAM VISHAMTA VADI BIJ BOTE HAI JIS KA FAL AAPKO UPPARI COMENTS ME MILA HAI ITIHAS PADHA HAI TO USE JANO AUR NAYA EK AISA ITIHAS BANAWO JO SAMTA PRASTAPIT KARE BHAI CHARA PAIDA KARE BUDHHA IS JAGATME SABSE MAHAN HAI JINHONE SANSAR KE SABHI PRANI MATRAVPE DAYA PREA KARNA SHIKHAYA PRADHNYA SHIL AUR KARUNAKA MANTRA DEKAR SAMTA VADI DHAMMKI STHAPNA KI INSANKO INSANOME INSAN BANKAR RAHANEKI EK ASHI TARKIB BATLAI USHI MARG KI AAJ SAMASTH VISVA KO JARURAT HAI KRIPAYA JIS VISAMTA VADI JAHIRELE SAMAJ NE AUR SAMAJ PRATHAVONE IS DESH KA STYA NASH KIYA US SAMAJ KI PHATI IJJAT KO APNE SARPAR LAD KAR MAT GHUMO NAHI TO FHI KOI AKBAR,MAHAMDGHORI,GAZANI,NIZAM,AURANGJEB AAYEGA HAMARI FHIR SE MAREGA AUR HAM DEKHTE RAHENGE AAPKI DUVASE AB SUDHARNE KA VAKT HAI HO SAKE TO SHUDAR JAVO

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  18. budhdh kash tum hote aaj apne andh bhakton ko dekh ker dukhi ho rahe hote jis sanatan dharm ke marg me chalker tumne bodhdhatva prapt kiya usi ko aaj tumhare bhakt gali de rahe hain ..ye waisa hi hai jaise koi bachcha apni maa ko galiyan de aur apni akarmanyata ke liye apni maa ko doshi thehraye ..per ye ehsaan faramosh nahi samjhenge inka brain wash ker dia gaya hai shaitaniyat ne inke dimagon me kabja kar rakha hai kalyug hai jab har taraf shaitaniyat havi ho rahi hai to ye bodhdh kese chhut jaenge kash budhdh tum hote tumhari sikshayon ko na manker tumhare naam ko apni community ka naam dekar ye log jehar ghol rahe hain samyakt satya tumhari siksha ko bhulker ye itihas ki satya ghatnao ko bhi jhutla rahe hain akarmanya aur nakaratmakta ke pujari .. budhdh ye tumhare pujne wale nahi hain ye shaitan ke pujari hain . kash budhdh tum hote...!!

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  19. budhdh ke mata pita kis dharm ko mante the ???
    budhdh kis ko dekhkar tap ke liye pravatt hue ???
    budhdh ne kis madhyam se satya ko jana ???
    budhdh ke bhavishya ke bare me itni satik bhavishyavani kisne ki thi ke ve sanyasi banenge ???
    sharm aa jaye to budhdh ko follow karna nahi aaye to dub marna.
    shaitaniyat aur gaddaron ke hath se likha gaya jhutha itihas padhker aap apni frustration to kam kar sakte hain per satya ko nahi chipa sakte wo prakashit hai aur prakashit rahega ..sanatan dharm sanatan tha sanatan hai aur sanatan rahega .

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  20. रात्रि के साढ़े तिन बजे है, ऊपर सब लेख ध्यान से पढता आया हूँ ! दिल में इतनी ख़ुशी हुयी कि कि मेरे देश के लोग इतिहास का अच्छा ज्ञान रखते है और सभ्य और सुन्दर बहस भी कर सकते है ! इतना होते हुए मुझे एक बात समझ में नहीं आरही है, कि अब शासक बदलने के लिए तलवार बन्दुक कि जरुरत नहीं है, सिर्फ एक बटन दबाने से सरकार बदलती है तो फिर कैसे भारत विरोधी ताकतें भारत पर ६६ सालसे राज करती है?

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  21. apne shayad Dr. Babasaheb Ambedkar ka nam nahi suna hoga ya unki kitabe nahi padhi hogi isliye bhagwan Buddha ke bare me aisi anab shanab bate kar rahe ho ,meri ak salah hai aap hindu dharma ki riddles jarur padhiye ,sach samne aa jayega.

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  22. Bramhin logo ko dakshina me Cow (Gai) kyon dete the pata hain kyonki unhe gai ke Navjat Baccho ka gosht bahut pasand tha. wo thodi na gwale the. wo to non vegetarian the. iske liya aap rahul sanskrutain ki holga te ganga padho

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    1. Are bhai wo kya kare the. Kya nahi issue zhanzhat me mat Pado.balki AAP jis Dharm Ko mante ho us Dharm ke niyamo ka palan karate ho kya ye batao. Aur apaka Uttar ha me hai to apane Dharm ki acchi sinkhe batao jinaka hum bhi anusaran kar sake.

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    2. Are bhai wo kya kare the. Kya nahi issue zhanzhat me mat Pado.balki AAP jis Dharm Ko mante ho us Dharm ke niyamo ka palan karate ho kya ye batao. Aur apaka Uttar ha me hai to apane Dharm ki acchi sinkhe batao jinaka hum bhi anusaran kar sake.

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  23. Mr.Tyagiji Apne Shayad Itihas Barabar Padha Nani, Bruhdradh ne nahi apni patni ko Raja Milind Ke Pas Bheja tha, wo to Gupta Dynasty ka Samrat Ramgupta tha Jisne Apni Rani Dhruvdevi ko Shaka Samrat Ke Pas Bhejne Ki Sandhi ki thi. Badme Dossra chandragupta ne rani ka Veshbhusha Banakar shaka raja ki Hatya kar di aur Ramgupta ko bhi mar dala.Janata ko Glalat information Mat Do. Apne Paap Doosre Pe mat Thopo

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  24. Mr.kush kumar ji. Ap se hm contect krna chahte h.kaise ho payga plz.

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  25. satya ko pramaan ki jaroorat nahi hoti jis jis ke liye jaisa lagta hai wo thik hota hai shudra kehte hum pe julm huye agar unpe julm huye hote to aaj wo desh ke c.m. p.m. naa hota varno ka vibhajan karm ke sidhhant pe kiya gaya tha , jis mein upar se niche ki or shreshta di gai , aap agar brhamano ko galat kehte hai to aap bhi thik nahi hai ,kyunki kalam pakadna aapko brhamno ne hi sikhyi hai . ek baat brahm gyani brhaman hai ye kehna thik nahi kyunki brhaman karm , jaati , aur gun se bana jata , brhaman pad vashishth ne bhi brahma se paaya , jo ki chhattriya the . to koi ladai nai koi jhagda nai . bas itna kaho ki sarve bhavntu sukhinah ............

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  26. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  27. मिस्टर नवीन जी अगर बौद्ध धर्मावलम्बियों ने विदेशियों का साथ दिया तो फिर आपके मतानुसार चाणक्य का शिष्य चन्द्रगुप्त मौर्य बौद्ध धर्म क्यों अपनाया.? आप अपने ज्ञान दुरुस्त करें? साक्ष्य की जरुरत हो तो हमसे जरूर संपर्क करें ?

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    1. In His early age Chandrgupt Morya was the followers of Vaishnv thoughts,and in his old age he look for words to Baoudhism by inspiring by anti Vedik anti social elemnts of the moury Regime,,!

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    2. चन्द्र गुप्त ने बुद्ध धर्म? अपनाया इसका कोई प्रमाण हे???? यहाँ तक की सम्राट अशोक ने भी कभी बुद्ध धर्म? नहीं अपनाया और बुद्ध नाम का कोई धर्म दुनिया में नहीं हे यहाँ तक की आंबेडकर की संविधान में भी नहीं हे

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  28. chandragupt morya jain dharmalamvi the na ki bhodhhist

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  29. Abe o jhanduon, Maurya Kshatriya the. Aur haan agar koi maurya shasak pathBhrasht ho gaya tha to PushyMitra ne jo kia wo sahi kia.
    Bauddh dharm bhi hinduo se hi nikla hai. Buddh ki moorti main bhi ghar me rakhta hu par is tarah ki wahyat behooda baaten nhi karta apne sanatan dharm ke khilaf.
    -Prakash Maurya
    Budaun(UP)

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  30. apni apni history thik karo gyani ban gaye aur itihas ke bare kuch pata nahi hai bas jhak lada rahe ho

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  31. गोबर की पूजा करनेवाले लोगों देश को मुरख मत बनाइये

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    1. मूर्खो को क्या मुर्ख बनाना अपने ही देश के लोगो का मजाक उड़ाते हो और यूरोपियन अमेरिकन चीजों का इस्तेमाल करते हो जिसमे गौमूत्र होता हे

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  32. thin information completely fake bhai writer kyu jhoot faila raha hai sari duniya janati hai ki bharat ka itihas kya hai tum konsi kaksham me padhe ho is desh ko desh banane wale mauryan the shung no desh k vat lagai aur deshdroh kiya shung ko pujnewala means bharat k sath deshdroh karane wala hai tujhe Menander abcd b pata nahi.

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  33. chankya ne kabhi chankya niti nahi likhi woh chankya ko badnam karne k liye 3 ya 4 sadi me lkhi gai hai aur chankya hamesha bramnhi shadyant ke viruddh rahate the. unka likha arthshastra padho. bramhno jhoota chankya samne rakha shame on those people apna varchasv badhane k liye jhoot ka stah lete hai

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  34. Jo bhi ho par main ek hindu hu maine apne hindu dharm main jitne ghatiya log dekhe hain utne kisi dharm main nahi dekha...isiliye main hindu dharm ko ghatiya dharm manta huan our sabse upar Manav dharm ko manta huan jinhe kuchh dharm ke dalalo ne hindu dharm banaya JAATIVAD OUR DUSRE BHED BHAV KHADE KIYE...ISI KARAN HINDU O KO REHTE HUYYE BHI NAYE DHARM NE JANM LIYA JAISE KI JAIN,SIKH,LINGAYAT KABIR PANTHI RAHIM PANTHI YE SABHI HINDU KE ATYACHAR SE HI JANME HUYE DHARM HAI JISE HUM NAKAR NAHI SAKTE....

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  35. Mera simple sawal kshatriyo our baki sabke upar brahmin hi kyu....

    Kshatriya bhi brahmani gulam the our aaj bhi hai

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  36. Mera simple sawal kshatriyo our baki sabke upar brahmin hi kyu....

    Kshatriya bhi brahmani gulam the our aaj bhi hai

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  37. एक अछूत के मन में बड़ी इच्छा हुई कि आखिर भगवान कैसा होता है ? ये लोग मंदिर जाते क्यों हैं ? जरुर कोई बात तो होगी । मुझको भी एक बार जरुर मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने चाहिये । ऐसे विचार मन में आते ही वो भी मंदिर को चल दिया । वो जैसे ही मंदिर में घुसा पुजारी उसको देखकर दूर से ही चिल्लाया - अबे कहाँ चला आता है अछूत ? क्या तुझको पता नही कि तुम्हारा मंदिर में आना वर्जित है ?
    उसने कहा - पुजारी महाराज जैसा भगवान तुम्हारा है, वैसा मेरा भी है । जब तुम भगवान के दर्शन कर सकते हो तो मैं क्यो नही ?
    पुजारी बोला - अबे मूर्ख तुझसे किसने कह दिया कि भगवान तुम्हारा है ? कहाँ लिखा है कि भगवान तुम्हारा ? दोबारा अपनी गंदी जबान से भगवान का नाम भी मत लेना ।
    उसने कहा - लेकिन आप तो कहते हो कि भगवान सभी का है । सब का मालिक एक है । सब उसी की संतान हैं तो क्या हम उसकी संतान नही हैं ?
    पुजारी ने कहा - देख सुन भगवान सबका है लेकिन तुम्हारा नही है । भगवान के नाम से हमारी घर गृहस्थी चलती है । हमको दान दक्षिणा मिलती है । तू क्या दे सकता है दस पाँच रुपये लेकिन जो अन्य लोग मंदिर आते हैं, वो नाराज हो जायेंगे । कहेंगे कि इस मंदिर में तो एक अछूत घुसा है और मंदिर अपवित्र हो गया है । अब इस मंदिर से हमको कोई लाभ नही होने वाला है और वो मंदिर आना ही छोड देंगे । जब वो मंदिर आना ही छोड देंगे तो हमारी रोजी रोटी का क्या होगा इसलिए तू मंदिर आने का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दे ।
    उसने कहा - आज तो मैं जरुर ही दर्शन करूँगा । मुझको तुम्हारे इन प्रवचनों से कोई लेना देना नही है और वो मंदिर की तरफ बढ़ने लगा । अब पुजारी को अहसास हो गया कि ये ऐसे मानने वाला नही है । ये आज मेरे पेट पर लात मारकर ही रहेगा । इसको रोकने के लिए जरुर कोई उपाय करना होगा । उसने मंदिर में घुसते अछूत को पकड़कर शोर मचाया - सुनों सुनों ये अछूत मंदिर में घुसकर भगवान को अपवित्र करना चाहता है । जल्दी आकर इसको रोको वरना अनर्थ हो जायेगा । उसका शोर सुनकर खेतों में काम करते दो चार लठैत फौरन लाठी लेकर आ गये । उन्होने आव देखा ना ताव फौरन उस पर लाठियों की बारिश कर दी । कमजोर शरीर ऊपर से बुढापा, वो निरीह मार झेल ना सका और दम तोड़ दिया ।
    उसको मृत देखकर पुजारी ने कहा इसके शरीर को नाले में फेंक दो और मेरे नहाने के लिए और मंदिर को धोने के लिए गौमूत्र का प्रबंध किया जाए । तुरंत ही लठैतो ने उसके लिए गौमूत्र का इंतजाम किया और मंदिर को गौमूत्र से धोया गया ।
    उधर उसकी आत्मा मरने के बाद यमराज के सामने पेश हुई ।
    यमराज : चित्रगुप्त इसकी मृत्यु कैसे हुई ?
    चित्रगुप्त : महाराज इसने मंदिर में घुसकर भगवान को अपवित्र करने की कोशिश की थी ।
    यमराज : इसकी इतनी धृष्टता कि ये भगवान को अपवित्र करे । इसको फौरन नर्क की भट्टी में झोक दिया जाए ।
    अछूत : भगवन ये तो कोई अपराध नही है । मैने तो सिर्फ भगवान के दर्शन ही करने चाहे थे ।
    यमराज : मूर्ख ये ही तो तेरा कसूर है । तुझसे किसने कह दिया कि भगवान तुम्हारा है ? भगवान ने खुद कहा है कि मैं सिर्फ द्विजों का भला कर सकता हूँ । किसी भी शूद्र को धर्म की बाते करने का अधिकार नही है और ना ही वो धर्म की बात कर सकता है फिर तुम्हारी ऐसी हिम्मत कैसे हुई ?
    अब अछूत को बात समझ आ गई थी । उसने यमराज से कहा अब मैं समझ चुका हूँ लेकिन मुझको एक मौका चाहिये ।
    यमराज : एक मौका ? कैसा मौका और किसलिए ?
    अछूत : मैं चाहता हूँ कि ये सच्चाई सबको बताई जाए कि भगवान हमारा नही है और उससे हमारा कोई संबंध नही है ।
    यमराज : तुमको मौका दिया जाता है ।
    तभी से हमारे जैसे लोग अपनी जान देकर समझाते फिर रहे हैं तब भी हमारे भाई समझ नही रहे हैं ।
    नोट : चित्रगुप्त, यमराज, स्वर्ग नर्क काल्पनिक हैं, इनका सच्चाई से कोई वास्ता नही है । अपनी बात समझाने के लिए इन काल्पनिक पात्रों का सहारा लिया गया है.
    Hindu dharm ke sataye log

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  38. inki kahani pari bara hi apsosh se kah sakta hu jo khud deshdrohi raha kewal apna swarth dekha aaj wo desh bhakt ban raha raha hai mai puchhna chahunga ki 712 ec dahir ko haraney ke wastey brahman dhan ke laalach mai muhmadbinkashim ko dharmdhwaj giraaney ka tarika bataya
    1026 ec somnath ke mandir ka gate brahman khola tha 1962 china india ki larayee mai bharat ki bhumi ko chineeyo ke kabjey mai karaney wala brahman shrikoul hi thaa guru gobind singh ke beto ko diwaar mai chunwaney waley sopney wala brahman hi thaa angrejo ko bharat mai vipaar karney ke liya prawesh karaney waley brahman hi they aour phir bhi desh bhakt banney ka dhoung kar rahey hai kala dhaan brahmano ka hai desh ke gaddaar brahman hai aaj bhi hai kewal desh ko be bakup banana aataa hai aour kuchh nahi

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  39. गजब का झूठ बोलते हो
    शर्म करो
    और डूब मरो

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  40. PLZ ....IS POST KE AAGE KA LEKH BHI JALDI PRAKASHIT KARIYE....MAI PRATICHA ME HUN..

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  41. जो पागल लोग अनपढ गवार पुष्यमित्र को राम केहते हे वो वलिमकि जी का अपमान करते हे वाल्मीकि जी का जन्म सात हजार साल पहले हुवा हे और अशोक काल २५०० साल के अंदर हे ये लोग खुद मजाक बन जाते हे

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  42. सात हजार साल पहले दुनियां कैसी होगी... कपडे सिलाई करनेवाले तो होते ही होंगे .. घोडे भी होंगे ..बहुत से धातुओं का आविष्कार भारतीयों ने कर लिया होगा... कागज कलम स्याही .. ग्रंथ.. किताब . भाषा.. धर्म.. पुष्पक विमान.. हिरण को क्यों मारें..क्या काम . बन्दरों का शिक्षित होना..राम. राम लिखना अब के बन्दर क्यों नहीं लिखते .. हमें औऱ ज्यादा सिखना है..।

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  43. पुष्यमित्र के माँ का भोसड़ा

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  44. पुष्यमित्र के माँ की चूत में गधे का लंड

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  45. सब लोग पुष्यमित्र के माँ की चूत में लंड घुसेड़ो

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  46. jab duniya ko akal bhi nahi thi tab baoudh shasko pass Nalanda aur Takshshila jaisi university thi aur unhe nasht karane ka kary pushpmitra ne kiya.......

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  47. मौर्य असली सूर्यवंशी थे ये कुछ मूर्ख लोग है जो मौर्यो या कुशवाहा का मनोबल गिराते है बौद्ध अवसरवादी व् अतिमहत्वाकांक्षी होते है और इनके पास विरोध करने के अलावा कुछ नहीं है

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  48. मौर्य असली सूर्यवंशी थे ये कुछ मूर्ख लोग है जो मौर्यो या कुशवाहा का मनोबल गिराते है बौद्ध अवसरवादी व् अतिमहत्वाकांक्षी होते है और इनके पास विरोध करने के अलावा कुछ नहीं है

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    1. sahi hai jo bhi mulnivashi hai voh kshatriya hi hai isme koi doubt nahi kar shakta lekin hum log brahmin log ke gulam ban ke kyun rahe. Brahmin aur baniya sirf 5.5% hai lekin sub party me dekho most of brahmin kyu? aapko nahi lagta ki humein bhi aatmsamman hona chahiye. agar voh dharm ka kary karte hai to dharm ke karyo mein hi rahe voh samay par kyu badal gaye aur hum log kyu nahi e aap nahi sochte? Mein Rajputra hoo lekin samay ke hisab se hum samje nahi iski vajah sebrahmno ne hamara use kiya. sub logo ko aapas me ladaya aur kitne log hamare mar gaye suna hai brahmin koi mara hai? Abhi URI ki baat karo e tyagiji jaise logo ne juth muth ka dikhaya tha social media pe ki marane vale mein saat brahmin the aur 4 rajpoot the lo kar lo baat jabhi such samne aaya to e log dikhay hi nahi diye. Brahmin apne ko kabhi hindu nahi manta e satya hai Vir savarkar ko padhiy 6 soneri pate ..... isme likha brahmin ne e kiya voh kiya jo bhi kiya achchha hi kiya to hum kshatriy log jakh mar rahe the kya?

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  49. Jo bhi itihas me hindu dharm par attack huva hai voh sirf aur sirf brahmno ke vajah se huva hai. Mohmad gajanvi ke eka commander tha voh brahmin tha. Jisne usko somnath par chadai karne ke liye nyota bheja voh kon tha. is ladai me brahmin logo ne vishwasghat kiya aur jo uska vaishnav aur shaiv sampraday ki ladai chal rahi thi uski vajah se brahmano ne somnath par chadai karavai. e hisrory mai likha huva hai. Muhmod ghori ko bulane ke jaychand ko kisne uksaya ek brahmin ne... Jabhi aurangzeb ne hinduo par zaziya dala tabhi brahmno ne kya kiya. Tabhi brahmno par zaziya kyu nahi lagta tha kya brahmin hindu nahi the ya hai hi nahi. Shri Ram ne parshuram ko haraya to brahmno ko laga ki voh abhi musibat mai hai toh usne ram ko apna liye. iske pahle bhagvan brahmin kul me hi kyu janam lete the? Shri Krishna ne indra ki pooja karne ki mana kiya tha bachpan mein kyu? kissi ne socha? lekin brahmno ko laga ki e mahapurush ko nahi apnayege toh hum musibat mein pad shakti hai isiliye usko bhi apna liye. Voh sab mulnivasi the aur isne bharat varsh ko mahan banane ki koshish ki lekin brahmno ne sab dharm grandho me pushya shring ke samay mein apna importance daal diya aur abhi tak hum sub logo ko 3.5 % log ladai karava ke marva rahe hai. Brahman aur baniya se door rahiye. e 5.5% apne desh mein raj karte hai kyu ki Mulnivashio yaani ki Kshatriy aur ittar jatio mein ekta nahi hai. Samjiye, sochiye........aur desh bachaye....

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  50. पहले हम अपना सम्मान तो करे तब कोई हमारा सम्मान करेगा,और इसके लिए ब्राह्मण बिलकुल दोषी नहीं है
    अगर हम गुलाम है तो ये हमारी कमी है,
    बल्कि मैं ऐसा मानता हूँ की महात्मा बुद्ध के बाद जितने भी उनके ठेकेदार हुए सब ने हमारा नुक्सान ही किया है

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  51. पहले हम अपना सम्मान तो करे तब कोई हमारा सम्मान करेगा,और इसके लिए ब्राह्मण बिलकुल दोषी नहीं है
    अगर हम गुलाम है तो ये हमारी कमी है,
    बल्कि मैं ऐसा मानता हूँ की महात्मा बुद्ध के बाद जितने भी उनके ठेकेदार हुए सब ने हमारा नुक्सान ही किया है

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  52. यह मिथ्या है कि श्रीराम जी ने सीता जी को वनवास दिया और शम्बूक का वध किया,
    यह किसी ने वाल्मीकि रामायण में प्रक्षेप (मिलावट) कर दिया है, जिसके 20 से भी अधिक जबरदस्त प्रमाण हैं, वाल्मीकि रामायण में पूरा उत्तर कांड ही मिलावट है!
    जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें:--

    राम ने न तो सीता जी को वनवास दिया और न शम्बूक का वध किया

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  53. tum sale hindu chutiye ... aise hi ladte rahna .... 20 saal baad dekho india bhi 80 % muslim hoga .. aur tum salo hindu minority ....haha .. ha ha ha ha ..

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  54. Pushya mitra Ram kaise ho sakte hain ?Adam bridge kitna purana hai? Mahabharat kab hua tha? Bachcha bhi janta hai kuchh nahi pata to fadhon ki tarah renka mat karo aur kaun bewaquf kshatriya Buddha ko Shudra kah raha hai? Pahle sahi dhang se paida ho jao aur 6-7 class ki book padho history ki. Rajputon ke sare surname to le liye chauhan ho ya rathore ya Gaur. Buddha kshatriya the lekin jyadtar aajkal baudh dharm apnane wale shudra hi hain! Mahavir jain bhi kshatriya the.

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  55. Pushya mitra Ram kaise ho sakte hain ?Adam bridge kitna purana hai? Mahabharat kab hua tha? Bachcha bhi janta hai kuchh nahi pata to fadhon ki tarah renka mat karo aur kaun bewaquf kshatriya Buddha ko Shudra kah raha hai? Pahle sahi dhang se paida ho jao aur 6-7 class ki book padho history ki. Rajputon ke sare surname to le liye chauhan ho ya rathore ya Gaur. Buddha kshatriya the lekin jyadtar aajkal baudh dharm apnane wale shudra hi hain! Mahavir jain bhi kshatriya the.

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  56. !!महतवपूर्ण तथ्य!! विचार करे कही फ़िर से वही गलती तो नही कर रहे है ब्राह्मणवाद तथा कथित हिन्दुत्व को सपोर्ट करके :-
    आप सभी बहनो भाइयो से अनुरोध हे दो minute का टाइम निकाल कर ये पोस्ट जरूर पढे ।
    1- अंग्रेजो ने 1795 में अधिनयम 11 द्वारा शुद्रों को भी सम्पत्ति रखने का कानून बनाया।
    2- 1773 में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट पास किया जिसमें न्याय व्यवस्था समानता पर आधारित थी।6 मई 1775 को इसी कानून द्वारा बंगाल के सामन्त ब्राह्मण नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी।
    3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा कन्या हत्या पर रोक अंग्रेजों ने लगाई (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के स्तन पर धतूरे का लेप लगाकर, एवम् गढ्ढा बनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा जाता था)
    4- 1813 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा ग्रहण करने का सभी जातियों और धर्मों के लोगों को अधिकार दिया।
    5- 1813 में अंग्रेजों ने दास प्रथा का अंत कानून बनाकर किया।
    6- 1817 में समान नागरिक संहिता कानून बनाया
    (1817 के पहले सजा का प्रावधान वर्ण के आधार पर था। ब्राह्मण को कोई सजा नही होती थी ओर शुद्र को कठोर दंड दिया जाता था। अंग्रेजो ने सजा का प्रावधान समान कर दिया।)
    7- 1819 में अधिनियम 7 द्वारा ब्राह्मणों द्वारा शुद्र स्त्रियों के शुद्धिकरण पर रोक लगाई। (शुद्रोंकी शादी होने पर दुल्हन को अपने यानि दूल्हे के घर न जाकर कम से कम तीन रात ब्राह्मण के घर शारीरिक सेवा देनी पड़ती थी।)
    8- 1830 नरबलि प्रथा पर रोक
    ( देवी -देवता को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों, स्त्री व् पुरुष दोनों को मन्दिर में सिर पटक पटक कर चढ़ा देता था।)
    9- 1833 अधिनियम 87 द्वारा सरकारी सेवा में भेद भाव पर रोक अर्थात योग्यता ही सेवा का आधार स्वीकार किया गया तथा कम्पनी के अधीन किसी भारतीय नागरिक को जन्म स्थान, धर्म, जाति या रंग के आधार पर पद से वंचित नही रखा जा सकता है।


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  57. 10-1834 में पहला भारतीय विधि आयोग का गठन हुआ। कानून बनाने की व्यवस्था जाति, वर्ण, धर्म और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर करना आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।
    11-1835 प्रथम पुत्र को गंगा दान पर रोक (ब्राह्मणों ने नियम बनाया की शुद्रों के घर यदि पहला बच्चा लड़का पैदा हो तो उसे गंगा में फेंक देना चाहिये।
    पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं स्वस्थ पैदा होता है।यह बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न जाय इसलिए पैदा होते ही गंगा को दान करवा देते थे।
    12- 7 मार्च 1835 को लार्ड मैकाले ने शिक्षा नीति राज्य का विषय बनाया और उच्च शिक्षा को अंग्रेजी भाषा का माध्यम बनाया गया।
    13- 1835 को कानून बनाकर अंग्रेजों ने शुद्रों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।
    14- दिसम्बर 1829 के नियम 17 द्वारा विधवाओं को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।
    15- देवदासी प्रथा पर रोक लगाई।ब्राह्मणों के कहने से शुद्र अपनी लडकियों को मन्दिर की सेवा के लिए दान देते थे। मन्दिर के पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे। बच्चा पैदा होने पर उसे फेंक देते थे।और उस बच्चे को हरिजन नाम देते थे। 1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़ 23 लाख थी जिसमें 2 लाख देवदासियां मन्दिरों में पड़ी थी।
    यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो में चल रही है।
    16- 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया।
    17- 1849 में कलकत्ता में एक बालिका विद्यालय जे ई डी बेटन ने स्थापित किया।
    18- 1854 में अंग्रेजों ने 3 विश्वविद्यालय कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे में स्थापित किये। 1902 में विश्वविद्यालय आयोग नियुक्त किया गया।
    19- 6 अक्टूबर 1860 को अंग्रेजों ने इंडियन पीनल कोड बनाया। लार्ड मैकाले ने सदियों से जकड़े शुद्रों की जंजीरों को काट दिया ओर भारत में जाति, वर्ण और धर्म के बिना एक समान क्रिमिनल लॉ लागु कर दिया।
    20- 1863 अंग्रेजों ने कानून बनाकर चरक पूजा पर रोक लगा दिया (आलिशान भवन एवं पुल निर्माण पर शुद्रों को पकड़कर जिन्दा चुनवा दिया जाता था इस पूजा में मान्यता थी की भवन और पुल ज्यादा दिनों तक टिकाऊ रहेगें।

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  58. 21- 1867 में बहू विवाह प्रथा पर पुरे देश में प्रतिबन्ध लगाने के उद्देश्य से बंगाल सरकार ने एक कमेटी गठित किया ।
    22- 1871 में अंग्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारम्भ की। यह जनगणना 1941 तक हुई । 1948 में पण्डित नेहरू ने कानून बनाकर जातिवार गणना पर रोक लगा दी।
    23- 1872 में सिविल मैरिज एक्ट द्वारा 14 वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवम् 18 वर्ष से कम आयु के लड़को का विवाह वर्जित करके बाल विवाह पर रोक लगाई।
    24- अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर इन जातियों को सेना में भर्ती किया लेकिन 1892 में ब्राह्मणों के दबाव के कारण सेना में अछूतों की भर्ती बन्द हो गयी।
    25- रैयत वाणी पद्धति अंग्रेजों ने बनाकर प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को भूमि का स्वामी स्वीकार किया।
    26- 1918 में साऊथ बरो कमेटी को भारत में अंग्रेजों ने भेजा। यह कमेटी भारतभारत में सभी जातियों का विधि मण्डल (कानून बनाने की संस्था) में भागीदारी के लिए आया था। शाहू जी महाराज के कहने पर पिछङो के नेता भाष्कर राव जाधव ने एवम् अछूतों के नेता डा अम्बेडकर ने अपने लोगों को विधि मण्डल में भागीदारी के लिये मेमोरेंडम दिया।
    27- अंग्रेजो ने 1919 में भारत सरकार अधिनियम का गठन किया ।
    28- 1919 में अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी और कहा था की इनके अंदर न्यायिक चरित्र नही होता है।
    29- 25 दिसम्बर 1927 को डा अम्बेडकर द्वारा मनु समृति का दहन किया।
    30- 1 मार्च 1930 को डा अम्बेडकर द्वारा काला राम मन्दिर (नासिक) प्रवेश का आंदोलन चलाया।
    31- 1927 को अंग्रेजों ने कानून बनाकर शुद्रों को सार्वजनिक स्थानों पर जाने का अधिकार दिया।
    32- नवम्बर 1927 में साइमन कमीशन की नियुक्ति की।जो 1928 में भारत के लोगों को अतिरिक्त अधिकार देने के लिए आया। भारत के लोगों को अंग्रेज अधिकार न दे सके इसलिए इस कमीशन के भारत पहुँचते ही गांधी ने इस कमीशनके विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन चलाया। जिस कारण साइमन कमीशन अधूरी रिपोर्ट लेकर वापस चला गया। इस पर अंतिम फैसले के लिए अंग्रेजों ने भारतीय प्रतिनिधियों को 12 नवम्बर 1930 को लन्दन गोलमेज सम्मेलन में बुलाया।
    33- 24 सितम्बर 1932 को अंग्रेजों ने कम्युनल अवार्ड घोषित किया जिसमें प्रमुख अधिकार निम्न दिए----

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  59. Handi hindu Hindustan ....Ye kitta bekar news paper Hai Abhi pdhakr samj me aaya....Kisi ki history kaise badnam our kharab kar k parosa jata Hai aaj samja..... India ki history bauddhonse se shuru hote Hai ye utta hi Sach Hai jitta ki tumhare is new paper k article me manusmruti wali buri gandh aari Hai...... Pahele apni history pta Karo ...Badme dusronki history likhna.....

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  60. Beta history janna ho na to mera pas as Jana Archaeology me Puri class kra dunga our tuze bhi Teri history yaad karwa dunga....Bolte ho ki raamayan and Mahabharata vaidik period me likhe Gaye Hai....Wht a fuck..... Agr wo waha likhe Gaye Hai to uski language and script Kya thi ghochu?
    Bolte ho ki ye pure Sanskrit literature the.....Pr Sanskrit to Gupta period se dikhayi deti Hai to wo vaidik me kaisi chli Gyi......Agr wo vaidik me think to Harappa k Baad our 600BCE to 200CE tk kaha gayab ho Gyi?
    Tumh Vaidik Vaidik bolne wale kehte ho ki Sanskrit sabse purani Language Hai....Me kehta hu ki Sanskrit ki mother Pali Hai Jo bauddhonki Language Hai....Our ye me evidence k sath bol Raha hu ...Hawaa me nahi.....
    Dusronpr ungli vuthaya aasan Hai pahele apne garebaan me zhakkar Dekho tum kitne saff ho?
    Waise bhi jaat paat k thekedaro tumhari aisi sochke wajhse hi bahot Hindu Buddhist bante jare Hai....1956 me Dr B R Ambedkar k under me 7 million logonne buddism ko apnaya...2016 me 5000 OBC Hindu family's Buddhist bn Gyi our aage me hi banne wali Hai.....
    Ab ye Kyo hora ye bta do.....Kya tumh logonke najar me bekar rehnewala Buddhism itta powerful bnta ja Raha Hai?
    Ha ye Sach Hai pr Buddhism bura nahi Hai buri to tumh logonki soch Hai....
    Bolte ho ki Buddhist log bhi Hindu Hai.... Buddh Vishnu ka avtar Hai....Wht a fuck.....
    Fir Kya pure world me rehne wale Buddhist wo bhi Hindu Hai Kya.....
    Chaina... Thailand.... Shrilanka..... Kambodiya....Bhutan....Japan....Kango....Maynmar....Ye sabhi countries Hindu countries honi chahiye..... Hahahaha
    Agr khudke baatonme itta hi dm Hai to international level pr bolo na ...Sabhi Buddhist countries fir kaise tumhari kholkr marte Hai Delhi.....

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  61. ये सनातन धर्म क्या है?

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  62. पूरी तरह से मनगढंत कहानी।

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  63. Dosto... history hamne kaha se padhi hai.... kisi ne to likhi hai..ab kaha ja sakta hai jisne bi likhi hai kisi na kisi ke parbhavai likhi ho..
    Aur ham sab bi apne apne anusar meaning nikal rahe hai..
    Lekin ak baat samjh aati hai ki chache brahman ho ya sudra...hamne sukh dukh sath sath hi kate hai hamari history bi ak hai.... aaj ke time to ladna chhodo isi karan ham log itne time tak gulam rahe....j

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  64. Brahmin ki vajah se khas tour pe gandhi is desh ke lower class ke logoka bahut nuksan hua hai. Aur ab hamare prime minister usme aur nuksan kar rahe. Unki aisi ek ek yojana hai ki garib hamesha ke liye garib hi rahega woh kabhi nahi sudhrega.

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  65. रोहित मोहिते तू अलिबागवरून आला आहेस का कारन तूला बौद्ध धऱमा बद्दल माहिती नाही. काय़ हा अडाणीपणा.तूज सारखे नीच लोक कशाला पैदा होतात काय़ माहित एहसानफरामोश.अशा लोकांना धरून चाबकाचा मार दिला पाहिजे. अक्कलशून्य कूठला.

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