शनिवार, 18 अप्रैल 2009

अर्जुन के देश में ये कैसा अकाल

जिस देश में अर्जुन व कर्ण जैसे लक्ष्यभेदक जन्म ले चुके हों, उस देश भारत को कुछ जूता फैंक लोग पूरे विश्व में बदनाम कर रहे है। बात इराक से शुरू होती है। महाभारत काल में आज का इराक भारतवर्ष का ही हिस्सा था। इस इराक के लोग भी अर्जुन के वंशज हुए।ये बात इराकी माने या न माने,हम तो मानते हैं। इराक में एक पत्रकार ने बुश पर जूता फैंक मारा, मगर बुश को वो जूता नही लगा। महाशय ने तुंरत दूसरा जूता फैंका,मगर अफ़सोस वो जूता भी बुश को नही लगा।
अब जब बात इराक की थी,तब हमारे भारत के लोग भी कहाँ पीछे रहने वाले थे। भारत में भी जूता चला और ऐसा चला कि रूकने का नाम ही नही ले रहा। सबसे पहले दैनिक जागरण के एक पत्रकार ने ग्रह मंत्री पि० चिदम्बरम पर जूता फैंका,मगर अंक प्राप्त किए शून्य ,यानि लक्ष्य चूका।दूसरी बार लक्ष्य साधा गया कांगरेसी सांसद नवीन जिंदल पर । लक्ष्य के काफी नजदीक होते हुए भी निशाना ठीक नही बैठा। तीसरी बार जूता फैंका गया आडवानी जी पर। भाजपा के ही एक कार्यकर्ता ने उन पर जूता फैंका मगर आडवानी जी भी को निशाना नही लगा।अब नंबर आया असम के एक सांसद का,जिस पर एक व्यक्ति ने नही,दर्जनों व्यक्तियों ने एक साथ जूते बरसाए ,भारत का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा की एक व्यक्ति का भी निशाना अपने लक्ष्य को न भेद पाया।
सोचकर भी शर्म आती है कि चिडिया कि आँख का भेदन करने वाले अर्जुन के देश में क्या कोई ऐसा एक भी व्यक्ति नही है जो किसी ६ फुट लम्बी व २ फुट चौडी लाशों पर अपना निशाना साध सके।
अब सोचता हूँ कि क्यों ना एक जूता -चप्पल फैंक ट्रेनिग स्कूल खोला जाय। जिसमे १००% लक्ष्य भेदन की गारंटी के साथ कुछ धन भी कमाया जाय। क्या आप मेरे स्कूल में एडमिशन लेंगे ?

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