गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

जोहर, जय - हर शब्द का पर्यावाची है.

भारत देश में लगभग २५०० वर्षों से विदेशी आक्रमण होते आयें हैं।सिकंदर के आक्रमण से लेकर मुस्लिम आक्रमणकारी,तथा उसके बाद आए अंग्रेजो तक ने भारत में लूट पाट के साथ साथ जो अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाई वह थी भारतीय महिलाओं के अपहरण व उनका चरित्र हरण करने की।
(इस बारे में मै आगे के लेखों में विसतार से लिखूंगा.)भारतीय वीरों के युद्ध में वीरगति प्राप्त होने के पश्चात् अपने सतीत्व को म्लेछों से सुरक्षित रखने के लिए उनकी पत्निया बड़े - बड़े हवन कुण्डों में अपने बच्चों को छाती से लगाकर जय हर के घोष करते हुए कूद जाया करती थी।बाद में जय हर ही जोहर हो गया। इस यज् में सर्वाधिक आहुति इस्लामिक आक्रमणों के समय दी गई। इस्लाम के जेहादिओं ने भारत में आक्रमणों के बाद वैदिक महिलाओं पर सर्वाधिकं अत्याचार किए।भारतीय नारी का जोहर व्रत संसार का सबसे वीरता पूर्ण कार्य था। ऐसी वीरता का उद्धरण समस्त विश्व के इतिहास में कही नही मिलता. भारतीय नारी म्लेछों के हाथ में न पड़कर उनके दानवी कुकर्मों से अपनी रक्षा करने के लिए जोहर व्रत करती थी .ऐसी महान वीरांगनाओं को मेरा शत शत नमन.

4 टिप्‍पणियां: