रविवार, 3 मई 2009

भारत के महान नेताओं की नजरों में इस्लाम

इस्लाम के सम्बन्ध में भारतवर्ष की कई महान विभुतियों ने समय समय पर हिंदू समाज को चेताया है................
लाला लाजपत राय.-----लालाजी ने श्री सी० आर० दास को १९२४ में लिखे एक पत्र में लिखा की, मैंने पिछले ६ मास् के दोरान अपना अधिकांश समय मुस्लिम कानून व मुस्लिम इतिहास के अध्यन में लगाया है। मै यह सोचने लगा हूँ कि, हिंदू -मुस्लिम एकता न तो सम्भव है और न ही व्यावहारिक। ...................... मै मुसलमानों पर विश्वास करने को तैयार हूँ,किन्तु कुरान औ़रहदीस के उन आदेशों का क्या होगा?मुस्लमान उनकी अवज्ञा नही कर सकते।
रविन्द्र नाथ टैगोर ------टैगोर जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के बारे में कहा है की, "हिंदू मुस्लिम एकता को लगभग एकदम असंभव बनाने वाली एक और महत्वपूर्ण वजह है की मुस्लमान अपनी देशभक्ति को एक देश तक सीमित नही रख सकते। ................मोहम्मद अली जोहर जैसे व्यक्तियों ने यह घोषित किया है कि, किसी भी हालत में किसी भी देश के मुस्लमान के खिलाफ खड़े होने की अनुमति नही है। "
डॉक्टर अम्बेडकर ------------"तमाम मान्यताओं के बाद इस्लाम की जिस बात पर ध्यान देना चाहिए , वह यह है कि जिस देश में मुस्लिम क़ानून नही है ,वहां यदि मुस्लिम कानून और राज्य के कानून में संघर्ष हो, तो मुस्लिम कानून को ही लागू होना चाहिए,और मुसलमानों को चाहिए कि वे मुस्लिम कानून को माने तथा राज्य के कानून को तोडे। "
"इस्लामिक कानून की इस व्यवस्था की वजह से भारत हिन्दुओं व मुसलमानों की साझी मात्रभूमि नही हो सकती। ................वह मुसलमानों की भूमि तब हो सकती है जब उस पर मुसलमानों का शासन हो । "
"यथार्थ वादी व्यक्ति को समझ लेना चाहिए की मुस्लमान ,हिन्दुओं को काफिर समझते है। जो बचाए जाने से कंही ज्यादा मरने लायक है। "
"इसका अधिक महत्त्व नही है की उन्मादी मुसलमानों के द्वारा मारे गए प्रतिष्ठित हिन्दुओं की संख्या कम है अथवा ज्यादा। प्रतिष्ठित मुसलमानों ने इन अपराधियों की कभी भी निंदा नही की। इसके विपरीत इन अपराधियों की तारीफ़ धार्मिक शहीद की तरह की गई।"
"मुसलमानों की राजनीती में जीवन के धर्म निर्पेक्ष वर्गों को कोई जगह नही मिलती है। "
"कोंग्रेस इस बात को समझने में असमर्थ रही है की मुसलमानों को सहूलियतें देते जाने से उसकी निति ने मुसलमानों की आक्रमकता को बढाया है और उससे भी बुरी बात यह है की, मुसलमानों को यह लगने लगा है कि, हिंदू पराजय वादी है और उसमे बदला लेने की प्रवति नही है। "
क्या ये महान नेता व बुद्धि जीवी झूठे है या आज के तथा कथित धर्म निर्पेक्ष नेता। ये बात पाठक गण स्वम सोचे .

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