रविवार, 20 सितंबर 2009

संसद चालीसा

संसद से सीधा प्रसारण-संसद चालीसा

देशवासियों सुनो झलकियाँ मै तुमको दिखलाता।
राष्ट्र- अस्मिता के स्थल से सीधे ही बतियाता।
चारदीवारी की खिड़की सब लो मै खोल रहा हूँ।
सुनो देश के बन्दों मै संसद से बोल रहा हूँ।१।

रंगमंच संसद है नेता अभिनेता बने हुए हैं।
जन- सेवा अभिनय के रंग में सारे सने हुए हैं।
पॉँच वर्ष तक इस नाटक का होगा अभिनय जारी।
किस तरह लोग वोटों में बदलें होगी अब तैयारी।२।

चुनाव छेत्र में गाली जिनको मुहं भर ये देते थे।
जनता से जिनको सदा सजग ये रहने को कहते थे।
क्या-क्या तिकड़म करके सबने सांसद- पद जीते है।
बाँट परस्पर अब सत्ता का मिलकर रस पीते हैं।३।

जो धर्म आज तक मानवता का आया पाठ पढाता।
सर्वधर्म-समभाव-प्रेम से हर पल जिसका नाता।
वोटों की वृद्धि से कुछ न सरोकार उसका है।
इसीलिए संसद में होता तिरस्कार उसका है।४।

दो पक्षो के बीच राष्ट्र की धज्जी उड़ती जाती।
राष्ट्र-अस्मिता संसद में है खड़ी-खड़ी सिस्काती।
पल-पल, क्षन-क्षन उसका ही तो यहाँ मरण होता है।
द्रुपद सुता का बार-बार यहाँ चीर-हरण होता है।५।

आतंकवाद और छदम युद्ध का है जो पालनहारा।
साझे में आतंकवाद का होगा अब निबटारा।
आतंक मिटाने का उसके संग समझोता करती है।
चोरों से मिलकर चोर पकड़ने का सौदा करती है।६।

विषय राष्ट्र के एक वर्ग पर यहाँ ठिठक जाते हैं।
राष्ट्र-प्रेम के सारे मानक यहाँ छिटक जाते हैं।
अर्थ-बजट की द्रष्टि जाकर एक जगह टिकती है।
एक वर्ग की मनुहारों पर संसद यह बिकती है।7।

अफजल के बदले मे जो है वोट डालने जाते।
सत्ता की नजरों में वे ही राष्ट्र भक्त कहलाते।
आज देश की गर्दन पर जो फेर रहे हैं आरे।
उनकी वोटो से विजयी नही क्या संसद के हत्यारे।8।

सर्वोच्च अदालत ने फाँसी का जिसको दंड दिया है।
संसद ने तो उसको ही वोटो में बदल लिया है।
इसलिए आज यह देश जिसे है अपराधी ठहराता।
वही जेल मे आज बैठकर बिरयानी है खाता।9।

मौत बांटते जिसको सबने टी० वी० पर पहचाना।
धुआं उगलती बंदूकों को दुनिया भर ने जाना।
सत्ता का सब खेल समझ वह हत्त्यारा गदगद है।
हत्या का प्रमाण ढूंढती अभी तलक संसद है।10।

यहमाइक-कुर्सी फैंक वीरता रोज-रोज दिखलाती।
पर शत्रु की घुड़की पर है हाथ मसल रह जाती।
जाने क्या-क्या कर जुगाड़ यहाँ कायरता घुस आई।
फ़िर काग -मंडली मधुर सुरों का पुरुष्कार है लायी।११।

जब एक पंथ से आतंकियों की खेप पकड़ में आती।
वोट खिसकती सोच-सोच यह संसद घबरा जाती।
तब धर्म दूसरे पर भी आतंकी का ठप्पा यह धरती है।
यूँ लोकतंत्र में सैक्यूलारती की रक्षा यह करती है। १२।

लोकतंत्र में युवाओं को हिस्सा जब देने को ।
चिल्लाती जनता है इनको भी भाग वहां लेने को।
बड़ी शान से जन इच्छा का मन यह रख देती है।
बेटों को सब तंत्र सोंप जनतंत्र बचा लेती है।१३

घोटाले अरबों -खरबों के यहाँ प्राय होते हैं।
चर्चे उनके चोपालों पर सुबह -सायं होते हैं।
अधिक शोर मचने पर सोती संसद यह जगती है।
आयोग बिठाकर दौलत को चुपचाप हजम करती है।१४

जो इसी धरा पर खाते-पीते साँस हवा में लेते।
माता का सम्मान नही पर इस धरती को देते।
उनके ही पीछे राष्ट्र सौंपने संसद भाग रही है।
एक मुस्त बदले में केवल बोटें मांग रही है । १५

देश-द्रोह में लगे रहें या करे देश बर्बादी ।
दे रही छूट यह हर उस दल को है पूरी आजादी।
बस एक शर्त का अनुपालन ही उनकी जिम्मेदारी।
सिंहासन का मौन- समर्थन करे हमेशा जारी ।१६

सरकार पाक की जब जी चाहे घुड़की दे देती है।
कान दबाकर संसद उसकी सब-कुछ सुन लेती है।
बोटो के भयवश न विरुद्ध कुछ साहस है यह करती।
एक वर्ग को पाक-समर्थक संसद स्वयम समझती। १७

पहले तो शत्रु इसी धरा पर हमले ख़ुद करवाता।
फ़िर हमलों के इससे ही प्रमाण स्वयं मंगवाता।
वह दो कोडी का देश फैकता रद्दी में है उनको।
यह कायर संसद युद्ध नही,प्रमाण भेजती उसको।१८

जब विस्फोटों की गूँज भीड़ के बीचों-बीच उभरती।
दस-पॉँच जनों के तन से जब ,शोणित की धार उबलती।
लाशों के चेहरों में वोटों की गणना को जुटती है।
यूँ बार-बार सत्ता पाने के सपने यह बुनती है। १९

रचनाकार ----मेरे पिता श्री देवेन्द्र सिंह त्यागी

13 टिप्‍पणियां:

  1. रंगमंच संसद है नेता अभिनेता बने हुए हैं।
    जन- सेवा अभिनय के रंग में सारे सने हुए हैं।
    पॉँच वर्ष तक इस नाटक का होगा अभिनय जारी।
    किस तरह लोग वोटों में बदलें होगी अब तैयारी।२।

    Bahut khub likha hai.Yun hi likhte rahiye.

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  2. मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और टिपण्णी देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया! मेरे इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है -
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com
    मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें!

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  3. सर्वोच्च अदालत ने फाँसी का जिसको दंड दिया है।
    संसद ने तो उसको ही वोटो में बदल लिया है।
    इसलिए आज यह देश जिसे है अपराधी ठहराता।
    वही जेल मे आज बैठकर बिरयानी है खाता।9।
    bahut sundar likha h...

    Thnx for visiting n commenting on ma blog...

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  4. thanks for comming on my blog.....aur aapka article kaaphi achcha hai.....

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  5. priy naveen main aapke blog par gaya kintu wahan kuchh padh n paaya kyonki mujhe wahan
    .............
    ............
    ...........
    .........
    yahee dikha aapto isme mahir hain ,mere yahan font kee problem ho gaii hai maine is hetu madad mangne blog bhee likhaa thaa .shateesh jee ne marg bhee sujhaya thaa kintu meree samajh me nahin aaya \yh samasya abhee 10-15 din se hii huii hai
    aapka
    Brijmohan shrivastava

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  6. kafi rochak likha hai aapne sansad chalisa..... . achchha vyang aur kataksh hai...badhai

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  7. विषय राष्ट्र के एक वर्ग पर यहाँ ठिठक जाते हैं।
    राष्ट्र-प्रेम के सारे मानक यहाँ छिटक जाते हैं।
    अर्थ-बजट की द्रष्टि जाकर एक जगह टिकती है।
    एक वर्ग की मनुहारों पर संसद यह बिकती है।7।

    kya khoob kahi

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  8. आप का धन्यवाद !अपनी राय देने का |यद्यपि मैं आप जैसा बड़ा रचनाकार नहीं ,आप के हमारे ब्लॉग में आने से हमारा उत्साह और बढता है |

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  9. जब एक पंथ से आतंकियों की खेप पकड़ में आती।
    वोट खिसकती सोच-सोच यह संसद घबरा जाती।
    तब धर्म दूसरे पर भी आतंकी का ठप्पा यह धरती है।
    यूँ लोकतंत्र में सैक्यूलारती की रक्षा यह करती है।
    bahut achchha.

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  10. लोकतंत्र में युवाओं को हिस्सा जब देने को ।
    चिल्लाती जनता है इनको भी भाग वहां लेने को।
    बड़ी शान से जन इच्छा का मन यह रख देती है।
    बेटों को सब तंत्र सोंप जनतंत्र बचा लेती है।१३
    ati sundar

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