शनिवार, 12 सितंबर 2009

पिछली एक सदी में इस्लाम का सबसे बड़ा बुद्धिजीवी अल्लामा इकबाल

इस्लाम में पिछली सदी में एक महानायक पैदा हुआ अल्लामा इक़बाल। सारे जहाँ से अच्छा लिखने वाले इस शायर को निसंदेह २० वीं सदी का इस्लाम का सबसे बड़ा बुद्धिजीवी व शुभ चिन्तक माना गया है। आजादी के बाद भी इस शायर को हमारे देश भारत के बुद्धिजीवी व धर्म निर्पेक्ष इस शायर की प्रसंशा करते नही अघाते।
सन १९०९ में इसी शायर ने शिकवा नाम से एक पुस्तक की रचना की और ४ वर्ष बाद इसी की पूरक एक और जवाब ऐ शिकवा की रचना की। इन पुस्तकों में इकबाल ने अल्लाह से कुछ मामूली सी शिकायत की है। इस्लाम के इस बुद्धिजीवी ने अल्लाह से शिकायत की है कि

"सारी दुनिया में हम मुसलमानों ने तुम्हारे नाम पर ही सब कुछ किया। तमाम काफिरों , दूसरे धर्मो को मानने वालो को ख़त्म कर दिया,उनकी मुर्तिया तोडी,उनकी पूरी सभ्यताये उजाड़ डाली। केवल इसलिए की वे सब तुम्हारी सत्ता को माने ,इस्लाम को कबूलें। मगर ऐ अल्लाह, तेरे लिए इतना कुछ करने वाले मुसलमानों को तूने क्या दिया? कुछ भी तो नही। उल्टे दुनिया के काफिर मजे से रह रहे है। उन्हें हूरे व नियामाते यहीं धरती पर मिल रही है, जबकि मुसलमान दुखी है। अब काफिर इस्लाम को बीते ज़माने की बात समझते है। "

इस शायर की अल्लाह से इस शिकायत पर भारत के मुस्लिम बुद्धिजीवी व हिंदू सेकुलर नेता क्या कहना चाहेंगे ? क्यो कि शिकवा को समझने के लिए अलग से बुद्धि लगाने कि आवश्यकता नही है।
भारत का एक महान लेखक खूसट खुशवंत सिंह ने तो इकबाल कि इस रचना का अंग्रेजी अनुवाद किया है और इस रचना की तारीफ़ में कसीदें पड़े है।
इस्लाम को भाईचारे का व प्रेम का संदेश देने वाला बताने वाले इस्लाम के इस बुद्धिजीवी की इस रचना को जरूर पढ़े,और समझें कि इसके लिए इस्लाम कि वो शिक्षा ही जिम्मेदार है जो इकबाल जैसे लोगो को कुरान व हादीसों से प्राप्त होती है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. aapki aadhi-adhuri jankari k liye kahna chahunga adhjal gagri chhalkat jaye. kripya Iqbal ka Jawab Shikwa padhe.aapki budhimata me kuchh vistar ho jayega. Rashtriya Swayam Sevak Sangh ke Mendhko ko parochial kue se bahar aana chahiye jo mushkil to hai par asambhav nahi. dhanyvad.

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  2. drsbharti ji सबसे अच्छा तरीका है अपनी झेप उतारने का या किसी बात को निष्पक्षता और गंभीरता से न लेकर बिना तर्क के बात को अनसुना करने का दिखावा करने का.

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  3. गुमनाम भाईसाब जी !! आप ही उन पुस्तकों का अध्यन करके लोगो तक अपने विचार पहुचाएं. जब तक आप कुछ उस पुस्तक के तथ्यों को प्रस्तुत करके अपना मंतव्य और तर्क नहीं रखते तब तक आपकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेगा और आपकी बात को कोई सत्य नहीं मानेगा. ये बाल बुद्दी का प्रलाप है बिना तर्क के अपनी बातों को मनवाना और किसी पर बिना मतलब लांछन लगाना ये मत समझना मैं राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ का सदस्य हूँ किन्तु उनके राष्ट्रवादी और उन्नति के लिए किये गए कार्य से सभी परिचित हैं यदि उनका कोई गलत कार्य या देश विरोधी कार्य आपको पता है तो बताइए. ऐसे किसी पर आप लांछन लगाकर अपने को सत्य सिद्ध नहीं कर सकते. ईश्वर आपको सत्बुद्धि दे !

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