बुधवार, 28 अक्तूबर 2009

अमेरिका भारत की धार्मिक नीतियों के बारे में बोलना बंद करे.

अब भारत सरकार की धार्मिक निति क्या हो और उसे पूरे देश में किस प्रकार लागू किया जाय ?इसकी चिंता अमेरिका सरकार को सताने लगी है। इस्लामिक देशों की अपने अपने देश में अल्पसंख्यकों के प्रति क्या निति है किस प्रकार सरेआम वहां अल्पसंख्यकों को मोत के घाट उतारा जा रहा है, किस प्रकार मानवाधिकारों की वहां धज्जियाँ उडाई जा रही हैं,यह सब देख सुनकर भी अमेरिका किसी भी छोटे मोटे इस्लामिक देश के विरूद्ध एक भी शब्द बोलने का साहस नही कर पाता। चीन की किसी भी घरेलू निति के बारे में बोलने में जिस अमेरिका की रूह कापती है,आस्ट्रेलिया में हो रहे भारतीय समाज पर हमलों के बारे में जिसने एक शब्द भी नही बोला है,वह आज भारत की धार्मिक निति पर खुले आम बयानबाजी कर रहा है तथा एक रिपोर्ट तैयार कराई है।
जी हाँ ,अभी हाल ही में अमेरिका के लोकतंत्र ,मानवाधिकार और श्रम मामलों के सहायक मंत्री माइकल एच पोजर ने भारत की केन्द्र सरकार की धार्मिक निति पर बोलते हुए कहा है की ,"प्रश्न यह है कि भारत की केन्द्र सरकार की निति को स्थानीय स्तर पर किस प्रकार लागू किया जाय। "
अमेरिका ने इस मामले में जो रिपोर्ट तैयार की है,उसमे कांग्रेस सरकार की धार्मिक निति (भारत का इसाई करण)
की प्रशंसा की है,तथा भाजपा की नीतियों की आलोचना की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि,"कुछ प्रदेशों में इस धार्मिक स्वतंत्रता को धर्मांतरण विरोधी क़ानून बनाकर या क़ानून में संशोधन करके इसे सीमित कर दिया है,और वहां पर अल्पसंख्यक लोगो पर आक्रमण करने वाले लोगो के विरूद्ध कोई भी प्रभावी कार्यवाही नही की गई है।" रिपोर्ट में वरुण गाँधी के भाषण का भी जिक्र किया गया है।
इस बात को अगर पूरी गहराई से परखा जाय,तो स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है कि किस प्रकार अमेरिका भारत को एक इसाई देश बनाने की सुनियोजित षड़यंत्र रच रहा है।
कभी राजग सरकार के साथ गलबहियां करने वाला अमेरिका किस प्रकार एक विदेशी इसाई महिला के हाथ में सत्ता की चाबी आते ही किस षड़यंत्र में लग गया है, यह रिपोर्ट साफ़ बताती है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. आज भारत की ये हालत है कि कोई भी छोटा सा देश इसको धमकी दे देता है जैसे कि बांग्लादेश, मलेशिया आदि, कोई भी इसको राजनीतिक या धार्मिक शिक्षा देता है जैसे कि यु. एस, ब्रिटेन आदि कोई भी उसकी धरती पर अधिकार जताता है जैसे कि चाइना, पाकिस्तान आदि. इनके अलावा अब तो लाखो तथ्य हैं जो राष्ट्रविरोधी हैं. इस देश का बेड़ागर्क हो चुका है अब इसे हजार चाणक्य, दयानंद सरस्वती आदि संत भी आकर इसको बचा नहीं सकते. हिन्दू जनता का दिमाग एक ही ढर्रे "विनाशकाले विपरीत बुद्धि " पर कार्य कर रहा है. उन्हें सेकुलरता की घुट्टी इतनी घोट-घोट के पिलाई गयी है वो अंधे, बहरे और गूंगे हो चुके हैं. चंद लोग आपस में तरक्की करके कहते नहीं थकते देश तरक्की कर रहा है. एक तो भीड़ इतनी हो चुकी हैं इस देश में आदमी के ऊपर आदमी चढा है ऊपर से भयंकर गरीबी तो कोई भी २ रोटी देकर उसका धर्म, ईमान सब बदल सकता है. और इस बात को पूरी दुनिया जानती है इसीलिए सभी मजहबों, देशो का सबसे आसान निशाना है.

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  2. ये सब नेहरु कांग्रेस की देंन है ,मैकाले आज भारत में सफल हो गया है |लेकिन हम मैकाले की सोच को बोम्ब से उड़ा देंगे |

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    1. Sir koi upay batayiye... In Mullins aur cristn ko apane desh se nikal bhagaye...

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  3. ये जो लेख आपने लिखा है जो एकदम सही है , लेकिन हमारे नेता अगर ठीक होते तो कोई भी देश हमारी और नजर नहीं उठा सकते , और मेकाले मरने के बाद भी से भारत में है

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