शनिवार, 12 जून 2010

छोडूंगा नहीं एक दिन तो शमशान घाट आवेगा.

मेरी सबसे पहली तुकबंदी "दूर की सोच "

एक दिन सुरेन्द्र शर्मा जी मन्दिर पूजा को गए।
मन्दिर से जब बाहर आए ,अपने नए जूते गायब पाये ।
जूते गायब देखकर ,सुरेन्द्र जी ने मचाया शोर,
तब एक फूल वाले से पता चला ,
कि जूते ले गया शैल नाम का चोर।
ठाणे में रपट लिखाई, जासूसों को पीछे लगाया,
पर शैल नाम का चोर कहीं पकड़ में न आया।
थक हार कर बेचारे श्रीमान,जा पहुचे सीधे शमसान ,
बोले शैल अब देखूँगा ,तने कोण बचावेगा
छोडूँगा नही एक दिन तो शमशान घाट आवेगा।

14 टिप्‍पणियां:

  1. थक हार कर बेचारे श्रीमान,जा पहुचे सीधे शमसान ,
    बोले शैल अब देखूँगा ,तने कोण बचावेगा
    छोडूँगा नही एक दिन तो शमशान घाट आवेगा।
    bhut sundar hasy hai .

    उत्तर देंहटाएं
  2. tyagi ji maja aa gaya bahut dino ke baad itni saf suthri hasy ras ki kaveeta padi hai.
    kya door kee sochi ha..ha.. ha ...ha..............

    उत्तर देंहटाएं
  3. सन्डे को फंडे बना दिया आपने .बहूत खूब .

    उत्तर देंहटाएं
  4. bilkul sahi kaha aap ne

    शानदार पोस्ट है...

    उत्तर देंहटाएं
  5. शैल अब देखूँगा ,तने कोण बचावेगा
    छोडूँगा नही एक दिन तो शमशान घाट आवेगा
    aanand aa gaya

    उत्तर देंहटाएं
  6. ... बेहतरीन ...प्रसंशनीय!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  7. शैल अब देखूँगा ,तने कोण बचावेगा
    छोडूँगा नही एक दिन तो शमशान घाट आवेगा
    मजेदार....

    उत्तर देंहटाएं
  8. bahut aanand aya ye padhkar aur achha laga ye dekh kar ki aaj bhi saaf suthre vyangya likhne wale log maujood hain.

    उत्तर देंहटाएं