मंगलवार, 19 जुलाई 2011

क्या श्री राम(shree ram) ने शुद्र(shudr) तपस्वी शम्बूक(shambook) का वध किया था?


कई बार एसा हुआ है कि हिन्दू धर्म के विषय में कुछ लोगों ने मह्रिषी शम्बूक की हत्या (श्री राम के द्वारा ) की बात करके मुझे चुप रहने के लिए मजबूर कर दिया है. मैंने भी बहुत सोचा कि जिस राम कि हम पूजा करते हैं ,जिनको एक आदर्श पुरुष मानकर पूरा भारत पूजता है,वे इतने निर्दयी कैसे हो सकते हैं कि बिना किसी कारन एक शम्बूक का वध केवल मात्र इसलिए कर दें कि शम्बूक शुद्र थे.
सर्वप्रथम तो में यहाँ पर एक बात अवश्य बताना चाहूँगा कि यह प्रसंग भव्भूती द्वारा रचित उत्तर रामायण के तृतीय चरण में शम्बूक वध में आता है. और यह काव्य रूप में है. काव्य में भावार्थ निकाला जाता है,और हजारों वर्ष पूर्व रचित उत्तर रामायण का भावार्थ कोई ज्ञानी पंडित ही लिख सकता है.
मै भी कुछ लोगों से मिला. शम्बूक वध को कई ब्लोगों में पढ़ा,कई पुस्तके पढ़ी, तो एक निष्कर्ष पर पहुंचा कि इस प्रसंग को ब्रह्मण व शुद्र का प्रसंग बताने वाले या तो महामूर्ख हैं या फिर देशद्रोही.
शम्बूक वध के तीसरे भाग आता है कि राम के प्रहार से शुद्र शम्बूक का वध हो गया.राम को बदनाम करने वाले केवल यही बात लोगों को बहकाने के लिए कहते हैं ,और दलितों का धर्मांतरण करने वाली इसाई मिशनरियां तो इस प्रसंग की इस घटना को और भी मसालेदार बनाकर दलितों के आगे परोसती हैं.
वास्तव में यह प्रसंग इस प्रकार है कि राम के पास एक वृद्ध ब्रह्मण अपने १३ वर्ष के पुत्र का मृत शरीर लेकर आता है और राम से कहता कि शुद्र शम्बूक ने मेरे पुत्र का वध अपनी तपस्या के लिए कर दिया है. (यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि शम्बूक को शुद्र इसलिए कहा गया है कि वह इक नरबली वाला कोई अनुष्ठान कर रहा था. )
अब इसी प्रसंग की पूरी बात करते है. प्रसंग है कि "राम शम्बूक के पास जाते हैं और उसका वध कर देते हैं और शम्बूक एक दिव्य पुरुष के रूप में बदल जाता है तथा अन्वेष्ट्व्यो यद्सी भुवने भूतनाथ: शरण्य बोलता हुआ श्री राम के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता है और वृद्ध ब्रह्मण को भी अपना पुत्र प्राप्त हो जाता है."
पुरे प्रसंग को पढ़कर सारा सत्य सामने आ जाता है कि इसका क्या भावार्थ होना चाहिए.
१- शम्बूक को शुद्र किसी जातिवाचक संज्ञा के रूप में नहीं कहा गया है.
२- राम ने शम्बूक का वध नहीं किया, उन्होंने शम्बूक के शुद्र रूप का वध किया और शम्बूक को अपने वचनों से ब्रह्मण बनाया.
३- प्रसंग कहता है कि इस प्रकार वृद्ध ब्रह्मण का पुत्र भी जीवित हो गया,यानि कि शम्बूक ने उस वृद्ध ब्रह्मण को अपना पिता मान कर उसकी सेवा शुरू कर दी.
४- राम ने केवल वही कार्य किया जो कि उनके महान चरित्र के अनुरूप था.
अब आप ही बताएं कि पूरे प्रसंग की बात न करके प्रसंग की केवलमात्र एक पंक्ति को ही मसाला बनाकर परोसने वाले लोगों को आप क्या कहेंगे?

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खोज पूर्ण एवं तथ्यात्मक बात कही है आपने | इसके लिए आपका बहुत धन्यवाद |
    यही तो दुर्भाग्य है हमारे हिन्दू समाज का की वो खुद तो आर्ष ग्रंथों का अध्यन नहीं करता |
    कोई कुछ भी तोहमत लगाए वो सहर्ष स्वीकार कर लेता है |

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  2. इसके साथ ही गलती हमारे पुराने आचार्यों की भी है
    जिन्होंने अपने फायदे के लिए हमारे धर्म ग्रंथों में मनगढ़ंत तथा
    अवैज्ञानिक बातें प्रक्षेप के रूप में घुसा दीं |
    महर्षि दयानंद जी ने भी इस प्रवृत्ति की घोर निंदा की है |
    उन्होंने तो पूरा उत्तर रामायण ही प्रक्षेप माना है तथा यह महर्षि वाल्मीके द्वारा लिखा हो ही नहीं सकता |

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  3. नवीन त्यागी जी बहुत दिनों के बाद आपका लेख पढने को मिला अच्छा लगा ! कहाँ खो गए थे आप ?

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  4. madan ji kuchh parivarik karyon me vyast tha.ab lagataar milte rahenge

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  5. apne bahut hi sundar or ek dam satya varnan kiya hai..

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  6. श्री राम के बारे में तो मैं कुछ नहीं कहूँगा पर ब्राम्हणों ने शुद्रो का मानसिक,आर्थिक और सामाजिक वध जरुर किया है....और इस राज का पर्दाफाश भी बहुत जल्दी करूँगा की आखिर अपने ही देश के भाइयो को वर्ण व्यवस्था के इतने घिनोने पायेदान पे क्यों डाला गया और क्यों उन्हें इतनी गन्दी जिंदगी जिनी पड़ी हजारो साल तक....ब्राम्हणों को इसका जवाब देना ही पड़ेगा कभी न कभी.....और आप हिन्दू धर्म(ब्राम्हण धर्म) की जितनी तारीफ कर ले पर ये सच है की वर्ण व्यवस्था के नाम पर दलितों का जितना शोषण हुआ है वो एक दलित ही समझ सकता है.....और हा आपको बता दू की शुद्रो को सतयुग में तपस्या करने का अधिकार नहीं था इसी कारण उस ब्राम्हण का पुत्र मर गया था न की किसी नरबली की क्रिया से....!

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    1. oye satish ye brahman ks beta mara h vo dvapar yug ki bat h or tu satyug ki kah raha h,satyug me to guno par aadharit varna vyavastha thi.

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    2. satish kumar aapme abhi kal ki kmi h brahmno ne to siksha dne ka kam kiya h abhi tak aaj to brahmno ko hi hin dristi se dekha jane lga h
      soch smaj ke bolo, naveen ji ne kewal dharam privrtan ke khilaf kha h kisi brahmin ya sudr ka paksh nhi liya h samjhe

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    3. bhut hi achha lekh hai

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  7. आपको वाल्मीकि कृत रामायण भी पडनी चाहिए ! वाल्मीकि जी ने शम्बूक वध का वर्णन बहुत विस्तार -पूर्वक किया है जिससे स्पष्ट हो जाता है कि किस तरह नारद,वशिष्ठ आदि ब्राम्हणों ने षड़यंत्रपूर्वक शम्बूक नामक शुद्र तपस्वी जो कि स्वर्ग जाने की कामना से तप कर था ,की ह्त्या श्रीराम के हाथो से करवाई ! श्रीमद वाल्मीकि रामायण उत्तरकांड पृष्ठ ७१३ ''त्रिसप्ततितमः सर्ग''से लेकर श्लोक क्रमांक २ से लेकर ''षटसप्ततितमः सर्ग''पृष्ठ ७३१-७३२ तक अध्ययन कीजिये !इस लिंक पर जाकर उत्तरकाण्ड वाल्लुम १० [Volume 10. Uttara Kanda (Uttarardh)]डाउन लोड करके आप स्वयं पड़ कर सच्चाई जान सकते है !यह वाल्मीकि कृत रामायण ‘’चत्तुर्वेदी द्वारका प्रसाद शर्मा ‘’द्वारा १९२७ में अनुवादित की गई थी !मूल श्लोको और हिन्दी अनुवाद सहित उपलब्ध है!लिंक-http://hinduebooks.blogspot.com/2011/07/shrimad-valmiki-ramayan-sanskrit-text.html

    आकाश.78

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    1. are aap hi kyo nhi pd lete भव्भूती द्वारा रचित उत्तर रामायण ko

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  8. भारत वर्ष में ब्राम्हण वर्ण या जाति अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु कोई भी कार्य कर सकती है ! धर्म ग्रंथो में जो बाते उनके विरुद्ध जाती है बहुत सी आसानी और सरलता से वे उन्हें प्रछिप्त [प्रक्षेप ]कहकर कन्नी काट लेती है !

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    1. yah galat h,parshuram or chankya ko nahi jante kya?

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    2. abh wo kam aap jaise log kr rhe h

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    3. chandresh ji agar chankya aur parshuram ji ke tyag ko jante to aisa khte hi kyon dimagi bimari h kuch

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  9. ab sudra(obc) jag raha he,ane vale dino me brahmniy chadyantro ka pardafhas ho ke hi rahega duniya ke koi bhi bhagvan is bar brhamn ko bachane nahi ayega.

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    1. abe tohe to aayenge bachane apni fikar kar

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    2. @बेनामी30 अगस्त 2012 12:47 am
      बकवास बंद कर साले मै OBC से हु लेकिन धर्म का पालन करता हून जय श्री राम

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