सोमवार, 7 जून 2010

यह मेरे इस देश को हो गया क्या आज है.


यह मेरे इस देशं को ये हो गया क्या आज है
ये जिन्दगी की प्रात है या जिन्दगी की सांझ है।

उद्देश्यहीन भीड़ क्यों हर तरफ खड़ी हुई।
हर आदमी के चेहरे पे गम की परत चढ़ी हुई।
यूं देखने मे हर कोई लगता तो पास-पास है।
लेकिन दिलों की दूरियां!! कैसा विरोधाभास है?
क्यों जिन्दगी के गीत की ये बेसुरी आवाज है।
ये मेरे इस ............................................................ ॥


हर सुबह की धूप का सूरज कही है को गया ।
चांदनी समेटकर अब चाँद भी है सो गया।
हर गली के बीच में वहशियाना शोर है।
क्यों खुद की आत्मा का खुद आदमी ही चोर है?
जाने कैसा बज रहा ये जिन्दगी का साज है।
ये मेरे इस देश .............................................. ॥


हर तरफ है नाचती हिंसा भरी जवानिया ।
मेरे वतन में रह गयी अहिंसा की बस कहानिया।
अन्न महंगा है तो क्या खून तो सस्ता हुआ।
यहाँ आदमी को आदमी है खा रहा हँसता हुआ।
गाँधी के सपनो पे बना ये कैसा रामराज है !!!!!
ये मेरे इस देश को .................................................... ॥


जीने की लालसा लिए बस जी रहा है आदमी ।
यूं विष का घूँट आप ही तो पी रहा है आदमी।
असत्य और कपट की जब बू रही हो खेतियाँ।
पाएंगी कहाँ से सच फिर आने वाली पीढियां।
फूलों भरे चमन का ये कैसा बुरा आगाज है।
ये मेरे इस ............................................................. ॥


इतने मुखोंटे आदमी के पास रहते है यहाँ।
हर बार चेहरे और ही हर बार दीखते हैं यहाँ।
यूं आदमी को जिन्दगी के दर्द का अहसास है।
पर जी रहा है इसलिए क़ल पर उसे विश्वास है।
ये जिन्दगी के जीने का कैसा नया अंदाज है।
ये मेरे इस देश को हो गया क्या आज है।


( यह रचना मेरे पिताजी ने १९७५ में रची थी । किन्तु आज भी ज्यों की त्यों प्रासंगिक है।)

11 टिप्‍पणियां:

  1. यूं आदमी को जिन्दगी के दर्द का अहसास है।
    पर जी रहा है इसलिए क़ल पर उसे विश्वास है।
    vah vah vah ................................................................................................................................................................................

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  2. हर सुबह की धूप का सूरज कही है को गया ।
    चांदनी समेटकर अब चाँद भी है सो गया।
    हर गली के बीच में वहशियाना शोर है।
    क्यों खुद की आत्मा का खुद आदमी ही चोर है?

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  3. "क्यों खुद की आत्मा का खुद आदमी ही चोर है"
    बड़ी गहरी बात है
    प्रभावशाली चिरयुवा विचारों से बनी कविता
    लेखक और लेखनी को प्रणाम करता हूँ

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  4. उद्देश्यहीन भीड़ क्यों हर तरफ खड़ी हुई।
    हर आदमी के चेहरे पे गम की परत चढ़ी हुई।
    यूं देखने मे हर कोई लगता तो पास-पास है।
    लेकिन दिलों की दूरियां!! कैसा विरोधाभास है
    bahut hi sundar rachna hai.

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  5. बहुत सटीक रचना की थी आपके पिताजी ने .. सचमुच आज भी प्रासंगिक है ये .. इसे प्रेषित करने के लिए धन्‍यवाद !!

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  6. इतने मुखोंटे आदमी के पास रहते है यहाँ।
    हर बार चेहरे और ही हर बार दीखते हैं यहाँ।
    यूं आदमी को जिन्दगी के दर्द का अहसास है।
    पर जी रहा है इसलिए क़ल पर उसे विश्वास है।

    Kya baat hai

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  7. यूं आदमी को जिन्दगी के दर्द का अहसास है।
    पर जी रहा है इसलिए क़ल पर उसे विश्वास है।
    ये जिन्दगी के जीने का कैसा नया अंदाज है।
    ये मेरे इस देश को हो गया क्या आज है।



    kya baat kahi hai javab nahi ..laajavab

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. हर तरफ है नाचती हिंसा भरी जवानिया ।
    मेरे वतन में रह गयी अहिंसा की बस कहानिया।
    अन्न महंगा है तो क्या खून तो सस्ता हुआ।
    यहाँ आदमी को आदमी है खा रहा हँसता हुआ।
    गाँधी के सपनो पे बना ये कैसा रामराज है !!!!!

    आजभी समयानुसार प्रासंगिक है यह महान रचना !! बस पिताजी से मेरी विनती है कि इस गाँधी के नाम को हटाकर किसी संत का नाम लगादें तो अधिक बेहतर होगा क्योंकि जो इस कविता से परिलक्षित होता है उसके कारणों में से गाँधी भी एक बहुत बड़ा कारण था.

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  10. vartman paridrashya me bhi ekdam sateek...

    इतने मुखोंटे आदमी के पास रहते है यहाँ।
    हर बार चेहरे और ही हर बार दीखते हैं यहाँ।
    यूं आदमी को जिन्दगी के दर्द का अहसास है।
    पर जी रहा है इसलिए क़ल पर उसे विश्वास है।
    ये जिन्दगी के जीने का कैसा नया अंदाज है।


    गाँधी जी का तीन बन्दर का सिद्धांत-एक नकारात्मक सिद्धांत http://bit.ly/b4zIa2

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  11. इस देश का भला जब होगा....
    जब यह मुसड़ो को निकला जायेगा..
    यह लोग वंदे मातरम नाही बोलते...
    इन की जगह तो अफगान/पाकिस्तान में है ...
    जहाँ इन के लोग आपस में लड़कर मर रहे है...
    अगर इन लोगो को अल्लाह से इतना प्यार है ..???
    तोह हम लोग रेअद्य है . उन को अल्लाह के पास भेजंगे के लिए...
    तब अल्लाह अल्लाह मुस्लिम ..खुदा करते बैठना...
    जय हिंद .. वन्दे मातरम

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